Adani Defence का 'मेक इन इंडिया' को बूस्ट! सेना को 11 महीने पहले सौंपी 'Prahar' LMGs

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AuthorAditya Rao|Published at:
Adani Defence का 'मेक इन इंडिया' को बूस्ट! सेना को 11 महीने पहले सौंपी 'Prahar' LMGs
Overview

Adani Defence ने भारतीय सेना को **2,000** 'Prahar' लाइट मशीन गन (LMGs) की पहली खेप सौंप दी है, वो भी तय समय से **11 महीने** पहले। ग्वालियर में बनीं ये मशीन गनें 'मेक इन इंडिया' पहल को मजबूत करती हैं और **40,000** LMGs के बड़े ऑर्डर का हिस्सा हैं।

Adani Defence का 'मेक इन इंडिया' में बड़ा कदम

Adani Defence and Aerospace ने भारतीय सेना के लिए 2,000 'Prahar' लाइट मशीन गन (LMGs) की पहली खेप को तय समय से 11 महीने पहले डिलीवर करके एक बड़ी मिसाल कायम की है। ग्वालियर स्थित अपने अत्याधुनिक प्लांट में निर्मित ये 7.62 mm कैलिबर की राइफलें, कुल 40,000 LMGs के बड़े ऑर्डर का हिस्सा हैं, जिनकी पूरी सप्लाई अगले तीन साल में पूरी होने की उम्मीद है। यह डिलीवरी न केवल 'मेक इन इंडिया' पहल को ज़ोरदार बढ़ावा देती है, बल्कि भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में Adani की बढ़ती क्षमता को भी दर्शाती है।

टेक्नोलॉजी और उत्पादन क्षमता का संगम

28 मार्च 2026 को हुई डिलीवरी सेरेमनी में रक्षा मंत्रालय के DG Acquisition A. Anbarasu और Adani Defence के CEO Ashish Rajvanshi मौजूद थे। Rajvanshi ने स्थानीय छोटे हथियारों के उत्पादन को स्थापित करने में लगे छह साल के प्रयासों पर प्रकाश डाला। 'Prahar' LMG, Israel Weapon Industries (IWI) के Negev NG7 डिज़ाइन पर आधारित है, जो सफल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रतीक है। Adani का ग्वालियर प्लांट, भारत का पहला इंटीग्रेटेड प्राइवेट स्मॉल आर्म्स हब बनने की ओर अग्रसर है, जिसकी सालाना उत्पादन क्षमता 1,00,000 हथियार तक ले जाने की है। इसका मुख्य उद्देश्य आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना और 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को पूरा करना है।

रक्षा बाजार का बढ़ता परिदृश्य

यह कदम भारत के रक्षा क्षेत्र के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित करता है। इस सेक्टर का बाजार 2026 में $31.76 बिलियन से बढ़कर 2031 तक $38.73 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। घरेलू सोर्सिंग नियमों और भू-राजनीतिक तनावों ने इस वृद्धि को और बढ़ावा दिया है। Adani Enterprises, जो Adani Defence की पेरेंट कंपनी है, का वैल्यूएशन करीब ₹2.35 लाख करोड़ है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना ​​है कि Adani Defence का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) अनुपात 17-22x है, जो इंडस्ट्री के औसत 41.19 से काफी कम है। हाल ही में, Adani Enterprises ने रखरखाव सेवाओं के लिए Air Works India के अधिग्रहण की योजना भी बनाई है। सरकारी नीति के तहत, डिफेंस आधुनिकीकरण फंड का 75% हिस्सा घरेलू सप्लायर्स को जाना तय है, जिससे Adani Defence जैसी कंपनियों को Lokesh Machines Limited जैसी फर्मों के साथ सहयोग में फायदा हो रहा है। Goldman Sachs का अनुमान है कि FY25-FY28 के बीच भारतीय प्राइवेट डिफेंस कंपनियों की EPS ग्रोथ 32% सालाना रहेगी।

संभावित जोखिम और चुनौतियाँ

हालांकि, Adani Defence एक जटिल परिदृश्य में काम करता है। व्यापक Adani Group को अपने कर्ज और गवर्नेंस को लेकर सवालों का सामना करना पड़ा है, जिसका असर उसकी सहायक कंपनियों पर भी पड़ सकता है। Adani Enterprises का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 2.03 है। इसके अलावा, छोटे हथियारों के उत्पादन में अभी भी कुछ एडवांस्ड सिस्टम्स के लिए विदेशी पार्टनर्स पर निर्भरता बनी हुई है। डिफेंस सेक्टर सरकारी ऑर्डर्स पर बहुत अधिक निर्भर करता है, इसलिए यह बजट में बदलाव और नीतिगत निर्णयों के प्रति संवेदनशील है। साथ ही, Lokesh Machines और Jindal Defence जैसी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है।

भविष्य की विकास संभावनाएँ

इन चुनौतियों के बावजूद, Adani Defence भारत के बढ़ते रक्षा खर्च और स्थानीय विनिर्माण पर बढ़ते फोकस से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। 1,00,000 की सालाना उत्पादन क्षमता और विस्तार की जा रही रखरखाव सेवाओं के साथ, कंपनी का लक्ष्य एक फुल-सर्विस डिफेंस प्रोवाइडर बनना है, जो निर्यात बाजारों के लिए भी आपूर्ति कर सके। भारत का लक्ष्य 2027 तक हथियारों के आयात में 70% आत्मनिर्भरता हासिल करना है, जिसमें 2025-2026 से ₹1.60 लाख करोड़ से अधिक के घरेलू डिफेंस उत्पादन का अनुमान है। 'Prahar' LMG जैसे महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट्स की सफल डिलीवरी, Adani Defence की इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में साख को और मज़बूत करेगी।

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