Adani Defence & Aerospace ने Indo-Russian Rifles Private Limited (IRRPL) के साथ **5 साल** का करार किया है। इसके तहत कंपनी AK-203 राइफल के लिए **7.62x39 mm** एम्युनिशन (गोला-बारूद) सप्लाई करेगी।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन में बड़ी छलांग
यह कॉन्ट्रैक्ट 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। कानपुर स्थित Adani Defence की फैसिलिटी में अब इन राइफल्स के लिए गोला-बारूद का निर्माण होगा। यह पहल न केवल सप्लाई चेन को मजबूत करेगी, बल्कि विदेशों पर हमारी निर्भरता को भी कम करेगी।
AK-203 प्रोजेक्ट की बारीकियां
साल 2021 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य उत्तर प्रदेश की कोरवा ऑर्डनेंस फैक्ट्री में 6 लाख से ज्यादा AK-203 राइफल्स का निर्माण करना है। IRRPL, जो इस पूरे प्रोजेक्ट को संभाल रही है, भारतीय और रूसी कंपनियों का एक जॉइंट वेंचर है। इसमें भारत की Advanced Weapons and Equipment India Ltd और Munitions India Ltd के साथ रूस की Concern Kalashnikov और Rosoboronexport शामिल हैं।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
बहुत से निवेशक Adani Defence को लेकर उत्साहित हो सकते हैं, लेकिन यहाँ एक पेंच है। Adani Defence & Aerospace एक अनलिस्टेड (Unlisted) सब्सिडियरी कंपनी है, यानी इसके शेयर शेयर बाजार में ट्रेड नहीं होते हैं। भले ही इसकी पैरेंट कंपनी Adani Enterprises लिस्टेड है, लेकिन इस विशेष कॉन्ट्रैक्ट का सीधा असर कंपनी के शेयर प्राइस पर निवेश के नजरिए से नहीं पड़ेगा।
रक्षा क्षेत्र में काम करना बेहद कैपिटल-इंटेंसिव (Capital-intensive) होता है। यहां क्वालिटी और सेफ्टी के मानक बहुत कड़े होते हैं। भविष्य में ऐसी निजी कंपनियों और सरकारी संस्थाओं के बीच होने वाली साझेदारी भारतीय रक्षा उद्योग की ग्रोथ को नई दिशा दे सकती है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
