टर्बोप्रॉप प्लेन बनाने वाली कंपनी ATR अगले 20 सालों तक हर साल भारत को 10 विमान सप्लाई करने की योजना बना रही है। रीजनल एविएशन में ग्रोथ इसका मुख्य कारण है। हालांकि, ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतें प्रोडक्शन को सालाना 40 प्लेन तक सीमित रखे हुए हैं, जिससे डिलीवरी में देरी हो रही है। ATR की भारत की मांग पूरी करने की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि वह पेंडेमिक से पहले के प्रोडक्शन लेवल को कितना वापस ला पाता है।
भारत बनेगा ATR का मुख्य ग्रोथ एरिया!
एयरबस (Airbus) और लियोनार्डो (Leonardo) के ज्वाइंट वेंचर ATR ने भारत को अपने टर्बोप्रॉप एयरक्राफ्ट के लिए एक अहम ग्रोथ मार्केट के तौर पर पहचाना है। कंपनी को उम्मीद है कि अगले दो दशकों तक भारत से हर साल 10 विमानों की लगातार मांग बनी रहेगी। इस लक्ष्य को भारत के बढ़ते रीजनल कनेक्टिविटी प्लान और 2030 तक करीब 100 नए एयरपोर्ट खोलने की सरकारी योजनाओं से बल मिल रहा है। फिलहाल, भारत में करीब 70 ATR विमान ऑपरेट कर रहे हैं, और कंपनी का मानना है कि जैसे-जैसे छोटे शहरों के लिए डोमेस्टिक एयर ट्रैवल ज्यादा सुलभ होगा, यह फ्लीट काफी बढ़ सकती है।
प्रोडक्शन की मार, डिलीवरी पर असर
एशिया-पैसिफिक रीजन की मांग ATR के ग्लोबल ऑर्डर्स का 40% हिस्सा है, लेकिन कंपनी प्रोडक्शन की दिक्कतों से जूझ रही है। फिलहाल, निर्माता सालाना सिर्फ 40 विमानों का प्रोडक्शन कर पा रहा है, जो कि पेंडेमिक से पहले के स्तरों से काफी कम है। ये प्रोडक्शन समस्याएं ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों से जुड़ी हैं, जिनसे पार्ट्स की सोर्सिंग और प्लेन असेंबल करने की क्षमता पर असर पड़ा है। लगभग 170 विमानों के ग्लोबल बैकलॉग के साथ, ATR ने 2030 तक सालाना आउटपुट को बढ़ाकर 60 प्लेन करने का लक्ष्य रखा है। निवेशकों के लिए, इसका मतलब है कि कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ फिलहाल नए ऑर्डर हासिल करने से ज्यादा सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर करने की उसकी क्षमता पर निर्भर है।
लोकल सपोर्ट पर खास ध्यान
भारत में बड़े फ्लीट को सपोर्ट करने के लिए, ATR पायलट ट्रेनिंग, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस और खास कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग जैसी लोकल सेवाओं के डेवलपमेंट पर विचार कर रहा है। इन क्षेत्रों में डोमेस्टिक पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करना रीजनल एविएशन मार्केट की लॉन्ग-टर्म व्यवहार्यता सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इन प्रोजेक्ट्स के लिए कोई खास टाइमलाइन या कैपिटल स्पेंडिंग का ब्यौरा नहीं दिया है।
मार्केट की चाल और ध्यान देने योग्य बातें
भारत का रीजनल एयर ट्रैवल मार्केट अभी भी काफी कम इस्तेमाल हो रहा है, जहां सालाना 4 अरब से ज्यादा इंटरसिटी ट्रिप्स में से सिर्फ 3% एयर ट्रैवल से होते हैं। यह लंबी अवधि में काफी विस्तार की गुंजाइश दिखाता है। ऐसे में, निवेशकों को ATR की डिलीवरी परफॉर्मेंस और करंट ऑर्डर बैकलॉग को क्लियर करने की उसकी प्रगति पर नजर रखनी चाहिए। प्रोडक्शन बढ़ाने में किसी भी तरह की देरी से कंपनी की भारतीय बाजार में अनुमानित ग्रोथ को भुनाने की क्षमता पर असर पड़ सकता है, जिससे कंपटीटर्स को फायदा हो सकता है या डोमेस्टिक सेक्टर में बड़े जेट एयरक्राफ्ट की ओर मांग शिफ्ट हो सकती है। 2030 तक 60 विमान प्रति वर्ष के प्रोडक्शन रेट के लक्ष्य को बढ़ाने की दिशा में कंपनी की प्रगति अगली महत्वपूर्ण अपडेट होगी।
