पोर्ट ब्लेयर में बाल-बाल बचे हादसे के बाद AAIB की बड़ी मांग: वायु सुरक्षा के लिए संयुक्त समझौता जरूरी

AEROSPACE-DEFENSE
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
पोर्ट ब्लेयर में बाल-बाल बचे हादसे के बाद AAIB की बड़ी मांग: वायु सुरक्षा के लिए संयुक्त समझौता जरूरी
Overview

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) चाहता है कि नागरिक उड्डयन समूहों और रक्षा प्राधिकरणों के बीच एक औपचारिक समन्वय ढांचा बनाया जाए। यह मांग फरवरी 2024 में पोर्ट ब्लेयर में एयर इंडिया की फ्लाइट और नौसेना के हेलीकॉप्टर के बीच हुए बाल-बाल बचे हादसे के बाद आई है। AAIB ने इस घटना का कारण कंट्रोलर की गलत判断 बताई और सूचना साझा करने में आई दिक्कतों को उजागर किया है।

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पोर्ट ब्लेयर की घटना ने खोली संचालन की खामियां

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने नागरिक विमानन सुरक्षा संगठनों और रक्षा संस्थाओं के बीच एक सहयोगात्मक ढांचा बनाने की औपचारिक सिफारिश की है। यह प्रस्ताव फरवरी 2024 में पोर्ट ब्लेयर हवाई अड्डे पर एयर इंडिया के एयरबस A319 और भारतीय नौसेना के एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) MK III के बीच हुई बाल-बाल बचने वाली टक्कर के बाद आया है। AAIB की रिपोर्ट ने अप्रोच कंट्रोलर के हवाई यातायात की स्थिति के अपर्याप्त मूल्यांकन को मुख्य कारण बताया, जिससे व्यावसायिक उड़ान भरने वाले विमान और प्रशिक्षण हेलीकॉप्टर के बीच पर्याप्त दूरी नहीं रह गई थी। विमान से बचने के लिए हेलीकॉप्टर को आपातकालीन कार्रवाई करनी पड़ी।

अनसुलझे समन्वय की कमी

जांच में पता चला कि रक्षा विमानन इकाइयों—जिनमें भारतीय वायु सेना, नौसेना और सेना शामिल हैं—और AAIB और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) जैसी नागरिक निगरानी निकायों के बीच औपचारिक सूचना साझाकरण की भारी कमी है। यह घटना दर्शाती है कि रक्षा अधिकारियों के साथ समन्वय में सुधार लाने के उद्देश्य से AAIB की 2021 और 2023 की पिछली सिफारिशों को अमल में नहीं लाया गया है। यह संरचित इंटरफ़ेस का अभाव लगातार हवाई सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करता है, खासकर साझा हवाई क्षेत्र में या ऐसे हवाई अड्डों पर जहां सैन्य और नागरिक दोनों विमानों का उपयोग होता है।

भविष्य के जोखिम को कम करने की रणनीतियाँ

ऐसे जोखिमों को रोकने के लिए, AAIB ने अपनी मौजूदा सिफारिशों को लागू करने और प्रस्तावित सहयोग संरचना को औपचारिक बनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। एक विशेष सुझाव यह है कि भारतीय नौसेना पोर्ट ब्लेयर में हवाई यातायात की निगरानी में सुधार के लिए एक द्वितीयक निगरानी रडार प्रणाली जोड़ने पर विचार करे। AAIB ने यह भी प्रस्तावित किया कि DGCA अपने नागरिक उड्डयन विनियमों (CAR) को अपडेट करे ताकि इसमें रक्षा विमानों से जुड़े जांच और रक्षा हवाई अड्डों पर होने वाली घटनाओं को शामिल किया जा सके। एयर इंडिया को उड़ान भरने वाले अपने क्रू सदस्यों के बीच रेडियो संचार अनुशासन में सुधार करने की सलाह दी गई ताकि महत्वपूर्ण उड़ान चरणों के दौरान स्पष्ट और अधिक सटीक संचार सुनिश्चित हो सके। इन कदमों का उद्देश्य उन सूचना और परिचालन अंतरालों को ठीक करना है जो पोर्ट ब्लेयर में हुई इस घटना का कारण बने।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.