SEBI NSE IPO को मंजूरी के करीब; T+0 सेटलमेंट में देरी

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Author Mehul Desai | Published:
SEBI NSE IPO को मंजूरी के करीब; T+0 सेटलमेंट में देरी
Overview

भारत का बाज़ार नियामक, SEBI, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO के लिए इस महीने के अंत तक अनापत्ति प्रमाण पत्र (no-objection certificate) जारी करने वाला है। साथ ही, SEBI कार्यान्वयन (implementation) की चुनौतियों के कारण T+0 सेटलमेंट की तत्काल योजनाओं को फिलहाल टाल रहा है। नियामक ने खुदरा निवेशकों (retail investors) और एनआरआई (NRIs) के लिए बाजार भागीदारी (market participation) बढ़ाने हेतु सरलीकृत केवाईसी (KYC) मानदंडों की भी घोषणा की है।

NSE IPO हकीकत के करीब: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को मंजूरी देने के कगार पर है। SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने शनिवार को संकेत दिया कि इस महीने के अंत तक अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने की संभावना है, जिससे NSE आगे की लिस्टिंग औपचारिकताओं के साथ आगे बढ़ सकेगा। T+0 सेटलमेंट पर रोक: पांडे ने यह भी कहा कि नियामक इक्विटी कैश मार्केट में T+0 रोलिंग सेटलमेंट के लिए सक्रिय रूप से जोर नहीं दे रहा है। महत्वपूर्ण चुनौतियों और सीमित स्वैच्छिक अपनाने (voluntary adoption) का हवाला देते हुए, SEBI इस तंत्र को स्पष्ट लाभ के बिना विघटनकारी (disruptive) मानता है। योग्य स्टॉक ब्रोकर्स के लिए वैकल्पिक T+0 कार्यान्वयन की समय सीमा पहले ही नवंबर 2025 तक बढ़ा दी गई थी। सरलीकृत ऑनबोर्डिंग की योजना: नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए, SEBI एक सुव्यवस्थित 'अपने ग्राहक को जानें' (KYC) प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य खुदरा निवेशकों और अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए कागजी कार्रवाई को कम करना है, जिससे ऑनबोर्डिंग अनुभव बेहतर हो सके। एनआरआई के लिए एक सुरक्षित एंड-टू-एंड केवाईसी ढांचे (framework) के लिए परामर्श आयोजित किए जाएंगे, जिससे भारत में भौतिक रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। बाजार वृद्धि जारी: भारत के पूंजी बाजारों (capital markets) ने मजबूत वृद्धि देखी है, जहां अद्वितीय निवेशकों (unique investors) की संख्या वित्तीय वर्ष 2020 में 4.3 करोड़ से बढ़कर 13.7 करोड़ हो गई है। चालू वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों में 311 IPO के माध्यम से बाजारों ने 1.7 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने की सुविधा प्रदान की है।