रियल एस्टेट का नया रोडमैप: शहरी समूहों से विकास की राह
बजट 2026 में रियल एस्टेट सेक्टर को सीधे इंसेंटिव (incentive) देने के बजाय, शहरी समूहों (urban agglomerations) को ग्रोथ का मुख्य जरिया बनाने पर ज़ोर दिया गया है। इस अप्रोच से प्रॉपर्टी की मांग (demand) के पैटर्न में बदलाव आने की उम्मीद है, क्योंकि यह शहरों के आस-पास के इलाकों को भी आर्थिक विकास से जोड़ेगा।
टियर 2/3 शहर: विकास का नया केंद्र
फाइनेंस मिनिस्टर ने साफ किया है कि 5 लाख से ज़्यादा आबादी वाले टियर 2 और टियर 3 शहरों को भविष्य के ग्रोथ सेंटर के तौर पर विकसित किया जाएगा। इन शहरों में नागरिक सुविधाओं (civic amenities), ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और पब्लिक सर्विसेज को बेहतर बनाने के लिए ₹5,000 करोड़ का फंड तय किया गया है। इस निवेश से इन छोटे शहरों में घरों, दुकानों और होटलों की मांग (demand) को भी पंख लगेंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट: कनेक्टिविटी से बदलेगी तस्वीर
सरकार की इस योजना को और मज़बूत करने के लिए कनेक्टिविटी पर भारी ज़ोर दिया गया है। सात नई हाई-SPEED पैसेंजर रेल कॉरिडोर, जिन्हें 'ग्रोथ कनेक्टर्स' नाम दिया गया है, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, वाराणसी और सिलीगुड़ी जैसे बड़े शहर समूहों को जोड़ेंगी। इससे सैटेलाइट टाउनशिप (satellite township) और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (transit-oriented development) को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, टूरिज़्म-बेस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जाएगा। कुल मिलाकर, फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है।
पब्लिक एसेट्स की मॉनेटाइजेशन: REITs को मिलेगा बढ़ावा
कैपिटल जुटाने के एक और बड़े कदम के तौर पर, सरकार पब्लिक सेक्टर की ज़मीनों और प्रॉपर्टीज़ को स्पेशल पर्पज़ REITs (Real Estate Investment Trusts) के ज़रिए मॉनेटाइज (monetize) करने की योजना बना रही है। इसका मकसद पब्लिक सेक्टर की प्रॉपर्टीज़ से अच्छी कमाई करना और लॉन्ग-टर्म इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (institutional investors) को आकर्षित करना है। हालांकि, इस बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग (affordable housing) के लिए सीधे इंसेंटिव या पॉलिसी सपोर्ट का ज़िक्र न होना इंडस्ट्री के लिए थोड़ी निराशा का सबब है।