Welspun Enterprises का बड़ा फैसला: बिहार के इस हाईवे प्रोजेक्ट को ₹1,000 करोड़ में बेचा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Welspun Enterprises का बड़ा फैसला: बिहार के इस हाईवे प्रोजेक्ट को ₹1,000 करोड़ में बेचा

Welspun Enterprises अपनी सहयोगी कंपनी Welspun Aunta-Simaria Project Private Limited (WASPPL) में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इस डील से कंपनी को करीब ₹1,000 करोड़ मिलेंगे, जो 'एसेट-लाइट' रणनीति का हिस्सा है।

Welspun Enterprises का बड़ा फैसला: बिहार के इस हाईवे प्रोजेक्ट को ₹1,000 करोड़ में बेचा

Welspun Enterprises अपनी सहयोगी कंपनी Welspun Aunta-Simaria Project Private Limited (WASPPL) में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इस डील से कंपनी को करीब ₹1,000 करोड़ मिलेंगे, जो 'एसेट-लाइट' रणनीति का हिस्सा है।

Welspun Enterprises Limited ने WASPPL के शेयर बेचने के लिए एक 'सिक्योरिटीज सब्सक्रिप्शन एंड परचेज एग्रीमेंट' (SSPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। WASPPL बिहार में Aunta-Simaria Ganga Bridge Highway Project की कंसेशनर (concessionaire) है, जो हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत काम करता है।

इस सौदे के तहत कुल एंटरप्राइज वैल्यू (enterprise value) करीब ₹1,000 करोड़ है। उम्मीद है कि यह डील 30 सितंबर, 2026 तक पूरी हो जाएगी।

'एसेट-लाइट' रणनीति को मिलेगा बढ़ावा

यह बिक्री Welspun Enterprises की 'एसेट-लाइट' रणनीति का एक महत्वपूर्ण कदम है। कंपनी का लक्ष्य इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स को डेवलप करना और फिर उन्हें बेचकर पूंजी को दोबारा निवेश करना है। इससे कंपनी को ट्रांसपोर्टेशन, जल, सीवेज और टनलिंग जैसे नए क्षेत्रों में निवेश के लिए फंड मिलेगा, जबकि बैलेंस शीट लचीली बनी रहेगी।

WASPPL एसेट की बिक्री, जो 31 मार्च, 2026 तक कंपनी के कंसोलिडेटेड इनकम (consolidated income) में 5.44% और कंसोलिडेटेड नेट वर्थ (consolidated net worth) में 1.90% का योगदान दे रही थी, कंपनी की लिक्विडिटी (liquidity) को काफी बढ़ाएगी।

क्या होगा आगे?

कंपनी को एडजस्टमेंट (adjustments) जैसे कैरिंग इंटरेस्ट, नेट करंट एसेट्स और पास-थ्रू रिसीवेबल्स के अधीन लगभग ₹1,000 करोड़ मिलेंगे। इस पूंजी को कंपनी की रणनीति के अनुसार नए डेवलपमेंट अवसरों में फिर से लगाया जाएगा।

जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें

यह ट्रांजैक्शन कुछ शर्तों पर निर्भर है, जिनमें नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और लेंडर्स (lenders) से जरूरी अप्रूवल (approvals) शामिल हैं। क्लोजिंग के समय नेट करंट एसेट्स और अन्य रिसीवेबल्स में होने वाले एडजस्टमेंट के कारण अंतिम राशि में भी बदलाव हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.