TVS Supply Chain Solutions ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY26) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने अपने इतिहास का सबसे ज़्यादा कंसोलिडेटेड रेवेन्यू **₹11,002.97 करोड़** दर्ज किया है और **₹117.02 करोड़** का प्रॉफिट (PAT) कमाया है। यह पिछले साल के घाटे से एक बड़ी वापसी है।
TVS Supply Chain ने दर्ज किया ऐतिहासिक रेवेन्यू
TVS Supply Chain Solutions Ltd. ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY26) के लिए अपने शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने ₹11,002.97 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू हासिल किया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) के ₹9,995.72 करोड़ से 10.08% ज़्यादा है। सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी ने ₹117.02 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है, जबकि पिछले साल यानी FY25 में ₹9.64 करोड़ का घाटा हुआ था।
यह क्यों मायने रखता है?
यह नतीजे TVS Supply Chain Solutions के लिए एक मज़बूत टर्नअराउंड (turnaround) का संकेत देते हैं। मुनाफे में वापसी, रिकॉर्ड रेवेन्यू और एक दमदार ऑर्डर पाइपलाइन (order pipeline) कंपनी के लिए अच्छी खबर है। कंपनी 100 Fortune Global 500 ग्राहकों को सेवाएं दे रही है और ₹1,207 करोड़ के नए बिज़नेस जीतने में कामयाब रही है, जो बाज़ार में इसकी मज़बूत पकड़ और ग्राहकों के भरोसे को दर्शाता है।
क्या था बैकस्टोरी?
FY25 में कंपनी को घाटा हुआ था। लेकिन इस बार, एडजस्टेड EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) में 15.48% का उछाल आया, जो ₹770.70 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि यह लागत में कमी (cost optimization) और ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) का नतीजा है। इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन सॉल्यूशंस (ISCS) और ग्लोबल फॉरवर्डिंग सॉल्यूशंस (GFS) दोनों सेगमेंट्स ने रेवेन्यू बढ़ाने में योगदान दिया है।
क्या बदलेगा अब?
कंपनी अब 'इंटीग्रेशन' से 'एक्सेलेरेशन' फेज में जा रही है। अब इसका फोकस एयरोस्पेस (Aerospace), डिफेंस (Defence) और कंज्यूमर (Consumer) जैसे हाई-मार्जिन सेक्टर्स पर होगा। कंपनी ने Swamy & Sons 3PL को एक्वायर (acquire) करने का एग्रीमेंट किया है और इटली की ALA Group के साथ एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में एंट्री के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी में 1 जुलाई, 2026 से नए मैनेजिंग डायरेक्टर, विकास चड्ढा (Vikas Chadha) कार्यभार संभालेंगे।
किन खतरों पर नज़र रखें?
खासकर मिडिल ईस्ट में ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tensions) माल ढुलाई मार्गों (freight routes) और कीमतों की स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। ग्लोबल फॉरवर्डिंग सॉल्यूशंस सेगमेंट के लिए अमेरिकी टैरिफ नीतियां (tariff policies) भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि कंपनी नए एक्वीजीशन को कितनी अच्छी तरह इंटीग्रेट करती है, नए मैनेजमेंट के तहत कैसा प्रदर्शन रहता है, और क्या कंपनी डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ को बनाए रख पाती है। इसके अलावा AI और वेयरहाउस ऑटोमेशन (warehouse automation) का इम्प्लीमेंटेशन भी अहम होगा।
