PNC Infratech को NHAI से कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुई गड़बड़ी के लिए कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) मिला है। कंपनी पर जुर्माना लग सकता है और मैनेजमेंट में भी बदलाव की बात चल रही है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि इससे उसके ऑपरेशंस पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा और मरम्मत का खर्च बजट में ही है।
PNC Infratech पर NHAI की पैनी नजर
PNC Infratech Ltd को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे (Package-2) पर करीब 300 मीटर के हिस्से में आई दरार को लेकर कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) मिला है। यह घटना 26 जुलाई, 2026 को भारी बारिश के कारण हुई थी और यह प्रोजेक्ट की कुल लंबाई के 0.5% से भी कम हिस्से को प्रभावित करती है।
क्या है पूरा मामला?
NHAI ने PNC Infratech को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के एक खास हिस्से को लेकर नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रोजेक्ट के करीब 64वें किलोमीटर (RHS) पर लगभग 300 मीटर की दरार के बाद आया है, जो कथित तौर पर 26 जुलाई, 2026 की भारी बारिश के चलते हुई। कंपनी इस नोटिस का जवाब देने की प्रक्रिया में है।
क्यों है यह अहम?
इस कानूनी कार्रवाई के चलते कंपनी पर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी (Performance Security) का 2% तक का जुर्माना लग सकता है। इतना ही नहीं, कुछ टेक्निकल स्टाफ को 3 साल तक के लिए डिबार (debar) किया जा सकता है और पेवमेंट कंडीशन इंडेक्स (Pavement Condition Index) के आधार पर कंपनी की रेटिंग भी घटाई जा सकती है। एक अंतरिम आदेश में प्रोजेक्ट मैनेजर, मिस्टर विवेक गुप्ता, को साइट से हटाने का भी निर्देश दिया गया था, जिसका कंपनी ने पालन किया है।
कंपनी का पक्ष
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट में निर्माण के बाद 15 साल की मेंटेनेंस की जिम्मेदारी शामिल है। कंपनी ने साफ किया है कि प्रभावित हिस्से की मरम्मत और सुधार का खर्च, कंसेशन एग्रीमेंट (Concession Agreement) के तहत इस अवधि के लिए पहले से ही रूटीन और मेजर मेंटेनेंस के तौर पर बजट में शामिल है।
आगे क्या होगा?
PNC Infratech कारण बताओ नोटिस का जवाब तैयार कर रही है। कंपनी ने प्रोजेक्ट मैनेजर को हटाने के अंतरिम आदेश का भी पालन कर लिया है। कंपनी का कहना है कि प्रोजेक्ट पर ट्रैफिक सामान्य रूप से चल रहा है और मरम्मत का काम जारी है।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों को PNC Infratech के NHAI को दिए जाने वाले जवाबों के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए। संभावित जुर्माने, स्टाफ पर डिबारमेंट की कार्रवाई और कंसेशन कंपनी की रेटिंग पर अंतिम असर मुख्य चिंताएं हैं। प्रोजेक्ट मैनेजर को हटाना भी जवाबदेही के मुद्दे को उजागर करता है।
