Jet Freight Logistics के नतीजों ने बाजार को प्रभावित किया है। कंपनी का सालाना मुनाफा **81.54%** बढ़कर **₹6.81 करोड़** हो गया है, जबकि रेवेन्यू स्थिर रहा। कंपनी अब Airbus A330 P2F प्रोग्राम के जरिए बड़े विस्तार की योजना बना रही है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
Jet Freight Logistics ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए शानदार आंकड़े पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) बढ़कर ₹6.81 करोड़ हो गया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹3.75 करोड़ था। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹444.30 करोड़ रहा है, वहीं अर्निंग पर शेयर (EPS) ₹0.81 से बढ़कर ₹1.47 पर पहुंच गया है। कंपनी का फोकस अब वॉल्यूम के बजाय हाई-मार्जिन ऑपरेशंस पर शिफ्ट हो गया है, जिसके चलते प्री-टैक्स प्रॉफिट में 83.3% का उछाल देखा गया है।
नई साझेदारी और एयरबस का साथ
कंपनी ने एक बड़ी स्ट्रैटेजिक डील साइन की है। Elbe Flugzeugwerke GmbH (EFW), Seclink Group और Confity Capital Partners के साथ मिलकर, Jet Freight भारत की पहली ऐसी कार्गो ऑपरेटर बन गई है जो Airbus A330 P2F (Passenger-to-Freighter) कन्वर्जन प्रोग्राम में शामिल हुई है। इससे कंपनी की अंतरराष्ट्रीय कार्गो क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
AGM और भविष्य की योजनाएं
कंपनी की 20वीं AGM 23 सितंबर, 2026 को तय की गई है। फिलहाल मैनेजमेंट ने कैश बचाने के लिए इस साल कोई डिविडेंड नहीं देने का फैसला किया है। AGM में मुख्य रूप से ₹250 करोड़ तक की बोररोइंग लिमिट बढ़ाने और ₹150 करोड़ तक के निवेश के लिए मंजूरी मांगी जाएगी।
निवेशकों के लिए जरूरी सतर्कता
हालाँकि कंपनी का IVR BBB-/Stable रेटिंग है, लेकिन कर्ज की लिमिट बढ़ाने से कंपनी पर वित्तीय भार बढ़ सकता है। इसके अलावा, ग्लोबल ट्रेड अस्थिरता और फ्यूल की कीमतों का असर भी कंपनी की मार्जिन पर पड़ सकता है। निवेशकों की नजर अब आगामी AGM के फैसलों और एयरबस विमानों के ऑपरेशंस शुरू होने पर रहनी चाहिए।
