इंडिगो (InterGlobe Aviation) को पहली तिमाही में तगड़ा झटका लगा है। कंपनी ने जून 2026 को समाप्त तिमाही में ₹238 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹2,176.3 करोड़ का मुनाफा था। रेवेन्यू बढ़ा, पर बढ़े खर्चों ने डुबोया।
Detailed Coverage
कंपनी की हालत (-
इंडिगो (InterGlobe Aviation) ने जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए ₹238 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है। यह पिछले साल की इसी अवधि में दर्ज ₹2,176.3 करोड़ के कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Net Profit) की तुलना में एक बड़ी गिरावट है।
रेवेन्यू बढ़ा, पर मार्जिन घटा
कंपनी की कंसोलिडेटेड इनकम (Consolidated Income) में 18.9% की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह ₹25,614.1 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹21,542.6 करोड़ थी। हालांकि, रेवेन्यू में इजाफे के बावजूद, कंपनी को घाटे का सामना करना पड़ा।
घाटे की मुख्य वजहें
इस लॉस का मुख्य कारण ऑपरेटिंग खर्चों (Operational Costs) में भारी वृद्धि है, खासकर एयरक्राफ्ट फ्यूल (Aircraft Fuel) की कीमतों में बड़ा उछाल। विमान ईंधन पर कंपनी का खर्च बढ़कर ₹10,832.9 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹5,832.6 करोड़ था। कंपनी जून 2026 से फ्यूल की कीमतों के लिए मार्केट-लिंक्ड प्राइसिंग पर आ गई है, जिससे यह बढ़त देखने को मिली।
आगे क्या?
कंपनी को अब बढ़ी हुई लागत और नए मार्केट-ड्राइव्हन फ्यूल प्राइसिंग के साथ तालमेल बिठाना होगा। मैनेजमेंट में भी कुछ बदलाव हुए हैं, जैसे हेड ऑफ ग्लोबल सेल्स और चीफ ह्यूमन रिसोर्सेज ऑफिसर (CHRO) का इस्तीफा। अब कंपनी को इन चुनौतियों से निपटना होगा, साथ ही ₹4,700 करोड़ से अधिक के टैक्स लिटिगेशन (Tax Litigation) और कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की जांच का भी सामना करना पड़ सकता है।
