FY26 में ₹2,393.6 करोड़ का नेट लॉस
InterGlobe Aviation लिमिटेड, जो इंडिगो एयरलाइन का संचालन करती है, ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष (FY26) के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने FY26 में ₹84,961.9 करोड़ का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from Operations) दर्ज किया। हालांकि, इसी अवधि में कंपनी को ₹2,393.6 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस (Consolidated Net Loss) हुआ है। यह पिछले तिमाही में दर्ज मुनाफे के बिल्कुल विपरीत है। FY26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में कंपनी का रेवेन्यू ₹22,438.4 करोड़ रहा, लेकिन इस तिमाही में ₹2,536.9 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया गया।
घाटे की बड़ी वजहें
FY26 के लिए दर्ज किए गए इस भारी नुकसान के पीछे कई बड़े कारण हैं। कंपनी को ₹1,796.4 करोड़ के एक्सेप्शनल आइटम्स (Exceptional Items) का सामना करना पड़ा, जिसमें नए लेबर कोड (Labour Codes) और ऑपरेशनल डिस्टरबेंस (Operational Disruptions) से जुड़ी लागतें शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी IGST लिटिगेशन (Litigation) और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच जैसे कानूनी और रेगुलेटरी मुश्किलों का भी सामना कर रही है, जिनसे भविष्य में वित्तीय देनदारियां बढ़ सकती हैं।
मैनेजमेंट में बड़े बदलाव
इस चुनौतीपूर्ण दौर में कंपनी के मैनेजमेंट में भी बड़े फेरबदल हुए हैं। इससे पहले की तिमाही (Q3 FY26) में InterGlobe Aviation ने ₹549.1 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। Q4 FY26 में नेट लॉस और पूरे साल के घाटे ने यह साफ कर दिया है कि यह कंपनी के लिए एक कठिन दौर रहा है। कंपनी के CEO Petrus Johannes Theodorus Elbers ने इस्तीफा दे दिया है और William Walsh को नया CEO नियुक्त किया गया है, जो अगस्त 2026 में पदभार संभालेंगे। Aloke Singh भी चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर (Chief Strategy Officer) के तौर पर कंपनी से जुड़े हैं।
आगे की राह और नई रणनीति
कंपनी के बोर्ड ने एक अहम कॉर्पोरेट फैसले को मंजूरी दी है: USD 450 मिलियन तक के फाइनेंस लीज ऑब्लिगेशन्स (Finance Lease Obligations) का प्रीपेमेंट (Prepayment)। इन पैसों का इस्तेमाल कंपनी की सब्सिडियरी InterGlobe Aviation Financial Services IFSC Private Limited द्वारा डायरेक्ट ओनरशिप (Direct Ownership) के लक्ष्य के साथ एयरक्राफ्ट और इंजन जैसी एविएशन एसेट्स (Aviation Assets) की खरीद में किया जाएगा। नए CEO William Walsh की नियुक्ति से कंपनी को नई रणनीतिक दिशा मिलने की उम्मीद है। निवेशक यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि नया नेतृत्व इन वित्तीय दबावों और रेगुलेटरी चुनौतियों का सामना कैसे करता है।
जोखिम पर नजर
कंपनी के सामने बड़े जोखिम भी हैं। भारी नेट लॉस ऑपरेशनल इनएफिशिएंसी (Operational Inefficiencies) या बाहरी दबावों का संकेत दे सकता है। एक्सेप्शनल आइटम्स, खासकर लेबर कोड और ऑपरेशनल डिस्टरबेंस से जुड़े, कंपनी के असली प्रदर्शन को छिपा रहे हैं। कंपनी IGST लिटिगेशन से उत्पन्न आकस्मिक देनदारियों (Contingent Liabilities) का भी सामना कर रही है, जिसके तहत ₹2,202.8 करोड़ का भुगतान विरोध स्वरूप किया गया है और यह रिकवर होने योग्य दिखाया गया है। इसके अलावा, दिसंबर 2025 में डोमेस्टिक फ्लाइट कैंसलेशन (Domestic Flight Cancellations) को लेकर CCI की जांच भी रेगुलेटरी जोखिम पैदा करती है।
भविष्य की चाल
निवेशकों को नए CEO William Walsh के नेतृत्व में कंपनी की लाभप्रदता (Profitability) हासिल करने की क्षमता पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। IGST लिटिगेशन और CCI जांच के नतीजे महत्वपूर्ण होंगे। साथ ही, USD 450 मिलियन के लीज प्रीपेमेंट का कंपनी के कैश फ्लो पर पड़ने वाला प्रभाव और एयरक्राफ्ट एसेट ओनरशिप की उसकी रणनीति पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
