IRCTC ने ट्रेनों और स्टेशनों पर खाने की क्वालिटी और हाइजीन को सुधारने के लिए Quality Council of India (QCI) के साथ एक अहम समझौता किया है। अब डिजिटल और थर्ड-पार्टी ऑडिट के जरिए खाने की सुरक्षा पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
खाने की क्वालिटी पर डिजिटल पहरा
अब रेल यात्रा के दौरान मिलने वाले खाने की सुरक्षा और स्वच्छता से कोई समझौता नहीं होगा। IRCTC ने QCI के साथ हाथ मिलाया है, जिसके तहत ट्रेनों और स्टेशनों पर मौजूद कैटरिंग यूनिट्स का पूरी तरह डिजिटल और थर्ड-पार्टी ऑडिट किया जाएगा।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
इस नई पहल में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मुख्य है। इंस्पेक्टर अब मोबाइल ऐप के जरिए ऑडिट करेंगे, जिसमें Geo-tagging, Time-stamping और फोटोग्राफिक सबूत अनिवार्य होंगे। इसका मतलब है कि कैटरिंग यूनिट्स की वास्तविक स्थिति का डिजिटल डेटा तुरंत उपलब्ध होगा।
क्या बदलेगा?
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी 24-घंटे का रिपोर्टिंग टाइम है। अगर ऑडिट के दौरान कोई कमी पाई जाती है, तो वेंडर को 24-घंटे के भीतर सुधार (Corrective Action) करना होगा। यह कदम वेंडर्स पर जवाबदेही बढ़ाएगा और FSSAI के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करेगा।
निवेशकों के लिए राय
यह कदम कंपनी की ब्रांड वैल्यू बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि कैटरिंग सेवा में सुधार से यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा। हालांकि, असली चुनौती ग्राउंड लेवल पर इसे लागू करने और शिकायतों में आने वाली गिरावट पर टिकी होगी।
