Facor Alloys ने मैन्युफैक्चरिंग कारोबार से किनारा कर लिया है और अब लॉजिस्टिक्स सेक्टर में कदम रख रही है। कंपनी को FY26 में **₹14.80 करोड़** का भारी घाटा हुआ है, जबकि ऑडिटर्स ने कंपनी के भविष्य पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
भारी नुकसान और बदलता बिजनेस मॉडल
कंपनी ने अपने पुराने मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स को पूरी तरह बंद कर दिया है। अक्टूबर 2023 में प्लांट बंद करने के बाद, कर्ज चुकाने के लिए कंपनी ने श्रीरामनगर स्थित प्लांट और मशीनरी को बेच दिया है। अब कंपनी अपना पूरा ध्यान लॉजिस्टिक्स, फ्रेट टर्मिनल मैनेजमेंट और कार्गो हैंडलिंग पर लगा रही है। रेल मंत्रालय से कंपनी को जनरल कार्गो टर्मिनल (GCT) विकसित करने के लिए इन-प्रिंसिपल मंजूरी मिल चुकी है।
फाइनेंशियल सेहत पर संकट
कंपनी के हालिया नतीजे काफी कमजोर रहे हैं। FY 2025-26 के लिए कंपनी का स्टैंडअलोन नेट लॉस ₹14.80 करोड़ रहा, जबकि ऑपरेशन्स से रेवेन्यू सिर्फ ₹1.47 करोड़ दर्ज किया गया।
ऑडिटर्स की 'लाल बत्ती' (Auditor's Warning)
निवेशकों के लिए दो बड़ी चिंताएं हैं:
- गोइंग कंसर्न (Going Concern): लगातार घाटे के कारण ऑडिटर्स ने कंपनी के कामकाज जारी रखने की क्षमता पर संदेह जताया है।
- डिसक्लेमर ऑफ ओपिनियन: मैनेजमेंट में बदलाव के चलते Facor Minerals (Netherlands) B.V. के फाइनेंशियल डेटा की पुष्टि नहीं हो सकी है, जिससे कंसोलिडेटेड नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कानूनी पचड़े
कंपनी फिलहाल दिल्ली इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर में Rajadhiraj Tirupani Vinayak Natraj Pvt. Ltd. के साथ एक आर्बिट्रेशन प्रक्रिया में उलझी हुई है। इसके अलावा, BSE ने लेट कंप्लायंस फाइलिंग के लिए कंपनी पर ₹23,600 का जुर्माना भी लगाया है।
