Duke Offshore के प्रमोटर्स अपनी 70.61% हिस्सेदारी Aspect Global Ventures को बेच रहे हैं। यह कंपनी का पूरा मालिकाना हक बदलने का संकेत है, जिसके बाद SEBI के नियमों के तहत पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर लाया जाएगा।
ड्यूक ऑफशोर में मालिकाना हक में बड़ा बदलाव
Duke Offshore Limited ने स्वामित्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। कंपनी के मौजूदा प्रमोटर्स ने एग्रीमेंट (SPA) के तहत अपनी कंट्रोलिंग हिस्सेदारी Aspect Global Ventures Private Limited को बेचने पर सहमति जताई है।
पाठक ध्यान दें: प्रमोटर्स की विदाई, नई कमान
इस डील के तहत, कंपनी के प्रमोटर्स, Albert Donald Duke, Avik George Duke, और Komal Duke, Aspect Global Ventures Private Limited को 69,59,800 इक्विटी शेयर बेचने पर सहमत हुए हैं। यह कंपनी की कुल वोटिंग इक्विटी शेयर कैपिटल का 70.61% हिस्सा है। शेयर की खरीद कीमत ₹30 प्रति शेयर तय की गई है।
ये डील क्यों महत्वपूर्ण है?
यह ट्रांजैक्शन Duke Offshore Limited के कंट्रोल में एक पूर्ण बदलाव का प्रतीक है। मौजूदा प्रमोटर्स का कंट्रोल खत्म हो जाएगा और नई एक्वायरर कंपनी का नेतृत्व संभालेगी। SEBI के टेकओवर नियमों के अनुसार, पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए एक मैंडेटरी ओपन ऑफर लाया जाएगा, जिससे उन्हें बाहर निकलने का मौका मिलेगा।
डील की पृष्ठभूमि
इस पूरी डील में प्रमोटर ग्रुप कंपनी से पूरी तरह बाहर हो जाएगा। यह ट्रांजैक्शन SEBI (Substantial Acquisition of Shares and Takeovers) Regulations, 2011 के तहत आता है, जो कंट्रोल बदलने पर पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर को अनिवार्य बनाता है।
आगे क्या बदलेगा?
ट्रांजैक्शन पूरा होने के बाद, मौजूदा डायरेक्टर्स इस्तीफा दे देंगे और Aspect Global Ventures के नॉमिनी बोर्ड में अपॉइंट किए जाएंगे। कंपनी अब नए मैनेजमेंट के तहत काम करेगी।
जोखिमों पर नजर
जब तक यह ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो जाता, कंपनी पर सख्त ऑपरेशनल शर्तें लागू रहेंगी। प्रमोटर्स को एक्वायरर की अनुमति के बिना नए प्रोजेक्ट शुरू करने, मौजूदा बिजनेस में बदलाव करने, सिक्योरिटीज इश्यू करने, बड़ी एसेट्स बेचने, लोन देने, वर्किंग कैपिटल के अलावा और कर्ज लेने, या डिविडेंड घोषित करने से रोका गया है।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को ओपन ऑफर से संबंधित 'डिटेल्ड पब्लिक स्टेटमेंट' के लिए भविष्य की फाइलिंग्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। साथ ही, अधिग्रहण पूरा होने की समय-सीमा पर भी ध्यान देना होगा। बाहर निकलने वाले शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर की शर्तें बेहद अहम होंगी।
