Sanathan Textiles ने FY 2025-26 के लिए अपने अब तक के सबसे बड़े कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹3,811.18 करोड़ दर्ज किए हैं। हालांकि, नए पंजाब प्लांट से डेप्रिसिएशन (Depreciation) और फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) बढ़ने के कारण कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Net Profit) घटकर ₹77.35 करोड़ रह गया।
Sanathan Textiles का बड़ा कारनामा, रेवेन्यू ने तोड़े सारे रिकॉर्ड!
Sanathan Textiles ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपना अब तक का सबसे शानदार कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹3,811.18 करोड़ दर्ज किया है। यह पिछले साल के मुकाबले 27.10% की जोरदार बढ़ोतरी है। लेकिन, इस रिकॉर्ड रेवेन्यू के बावजूद, कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट घटकर ₹77.35 करोड़ रह गया, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह ₹160.45 करोड़ था।
क्या है पूरी कहानी?
Sanathan Textiles Limited ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने ऑपरेशन्स से ₹3,811.18 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू हासिल किया। वहीं, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹77.35 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के ₹160.45 करोड़ की तुलना में काफी कम है। अगर स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों की बात करें, तो रेवेन्यू ₹3,037.86 करोड़ रहा और नेट प्रॉफिट ₹191.91 करोड़ दर्ज किया गया।
रेवेन्यू क्यों बढ़ा, प्रॉफिट क्यों घटा?
कंपनी की बढ़ती मांग और विस्तार योजनाओं का असर रेवेन्यू पर साफ दिख रहा है। खासकर, पंजाब के वजीराबाद में नया ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट (Manufacturing Plant) चालू हो गया है, जिसकी क्षमता मार्च 2026 तक 700 MTPD तक पहुंच गई थी। यही वजह है कि रेवेन्यू ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
लेकिन, निवेशकों के लिए चिंता की बात प्रॉफिट में आई गिरावट है। कंपनी का कहना है कि नए प्लांट से जुड़े एसेट्स (Assets) के कैपिटलाइजेशन (Capitalization) के कारण डेप्रिसिएशन (Depreciation) और फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) में हुई बढ़ोतरी ही इस गिरावट की मुख्य वजह है।
आगे क्या उम्मीदें?
Sanathan Textiles मुख्य रूप से पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न (Polyester Filament Yarn) (रेवेन्यू का 82%), कॉटन यार्न (Cotton Yarn) (15%) और टेक्निकल टेक्सटाइल्स (Technical Textiles) (3%) के कारोबार में है। कंपनी का मानना है कि जैसे-जैसे नए प्लांट की यूटिलाइजेशन (Utilization) बढ़ेगी, कंपनी को ऑपरेटिंग लेवरेज (Operating Leverage) का फायदा मिलेगा। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि इन एसेट्स के मैच्योर (Mature) होने के साथ मार्जिन (Margin) और कैश फ्लो (Cash Flow) में सुधार होगा। इसके अलावा, सरकार की ओर से कच्चे कॉटन के इंपोर्ट (Import) पर छूट जैसी नीतियां भी इसे सहारा देंगी।
क्या हैं जोखिम?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा कंसर्न (Concern) कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में आई यह तेज गिरावट है, जो सीधे तौर पर नए पंजाब प्लांट से जुड़े ब्याज और डेप्रिसिएशन के बढ़े हुए खर्चों से जुड़ी है। इसलिए, इस प्लांट की रैंप-अप (Ramp-up) और यूटिलाइजेशन रेट्स (Utilization Rates) पर नजर रखना जरूरी होगा कि यह भविष्य में कंपनी के नतीजों को कैसे प्रभावित करता है।
आगे क्या देखें?
आने वाली तिमाहियों में, निवेशकों को नए पंजाब प्लांट की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Capacity Utilization) और ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। साथ ही, टेक्निकल टेक्सटाइल्स की क्षमता बढ़ाने और मध्य प्रदेश में कॉटन यार्न यूनिट लगाने की योजनाओं की प्रगति भी महत्वपूर्ण रहेगी।
