Pasari Spinning Mills की एनुअल रिपोर्ट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक दशक से कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग काम बंद है और अब कमाई सिर्फ किराए से हो रही है। ऑडिटर्स ने कंपनी की वित्तीय स्थिति और कानूनी विवादों को देखते हुए 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) को लेकर चेतावनी जारी की है।
मुनाफे का गणित और जमीनी हकीकत
कंपनी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रेवेन्यू घटकर ₹0.53 करोड़ रह गया है, जबकि पिछले साल यह ₹0.69 करोड़ था। कंपनी का नेट प्रॉफिट भी ₹0.36 करोड़ से गिरकर ₹0.28 करोड़ पर आ गया है। कंपनी का कोर बिजनेस यानी स्पिनिंग का काम 2010-11 से ही बंद पड़ा है। आज यह कंपनी केवल अपनी प्रॉपर्टी को किराए पर देकर गुजारा कर रही है।
कानूनी पचड़ों में फंसी कंपनी
ऑडिटर्स की सबसे बड़ी चिंता 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस को लेकर है। कंपनी पर Cotton Corporation of India का ₹7.03 करोड़ का दावा है, जिस पर फिलहाल कर्नाटक हाई कोर्ट से स्टे लगा हुआ है। इसके अलावा, कंपनी पर 1999 से चला आ रहा ₹1.80 करोड़ का टैक्स विवाद भी पेंडिंग है।
क्यों हैं ये रेड फ्लैग्स?
- गवर्नेंस में चूक: कंपनी के CFO ने मेडिकल कारणों का हवाला देते हुए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर साइन ही नहीं किए।
- Compliance Risk: BSE ने SEBI के नियमों का पालन न करने पर कंपनी पर जुर्माना लगाया है।
- अनपेड टैक्स: FY 2019-20 से प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान नहीं हुआ है।
आगे क्या होगा?
कंपनी की 35वीं AGM (Annual General Meeting) 19 सितंबर, 2026 को होने वाली है। निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी इन कानूनी और टैक्स विवादों को कैसे सुलझाती है और क्या उनके पास बिजनेस को दोबारा शुरू करने का कोई ठोस रोडमैप है या नहीं।
