Mohite Industries के लिए पिछला फाइनेंशियल ईयर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। कंपनी का रेवेन्यू घटकर **₹153.34 करोड़** और मुनाफा गिरकर **₹3.62 करोड़** पर आ गया है। कंपनी पर कर्ज का दबाव बढ़ गया है, जिसे लेकर LIC Housing Finance और Bank of Baroda ने SARFAESI नोटिस जारी किए हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का हाल
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चिंता बढ़ाने वाले हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के ₹166.75 करोड़ से फिसलकर ₹153.34 करोड़ पर आ गया है। नेट प्रॉफिट (PAT) भी पिछले साल के ₹5.33 करोड़ से घटकर ₹3.62 करोड़ रह गया है। स्टैंडअलोन ऑपरेशंस की बात करें तो वहां गिरावट और भी गहरी है, जो कि ₹99.33 करोड़ पर आ गई है।
कर्ज और कानूनी संकट
कंपनी फिलहाल भारी लिक्विडिटी क्राइसिस से गुजर रही है। बकाया भुगतान न कर पाने के कारण LIC Housing Finance और Bank of Baroda ने SARFAESI एक्ट की धारा 13(2) और 13(4) के तहत नोटिस जारी किए हैं। यह स्थिति कंपनी के एसेट और ऑपरेशंस पर बड़ा खतरा पैदा कर रही है।
रिकवरी का प्लान
इस संकट से निकलने के लिए बोर्ड ने 14 जनवरी 2026 को ₹150 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने की मंजूरी दी है। कंपनी की योजना इन फंड्स का इस्तेमाल ऑपरेशंस को चलाने और वित्तीय अड़चनों को दूर करने के लिए करने की है। साथ ही, मैनेजमेंट में बदलाव करते हुए Sangramsinh Subhashrao Nimbalkar को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।
बाजार की चुनौतियां
टेक्सटाइल सेक्टर में मंदी के चलते कंपनी के विस्तार और मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम पर बुरा असर पड़ा है। हालांकि धागे के प्रोडक्शन में 50% की बढ़त देखी गई, लेकिन धागे और कपड़े की कुल बिक्री में 26.34% की गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या कंपनी बैंकों के साथ अपने बकाया विवाद को सुलझा पाती है या नहीं।
