Konark Synthetic: मुनाफे में वापसी लेकिन सब्सिडीरी की बदहाली से बढ़ी टेंशन

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AuthorMehul Desai|Published at:
Konark Synthetic: मुनाफे में वापसी लेकिन सब्सिडीरी की बदहाली से बढ़ी टेंशन

Konark Synthetic ने FY 2025-26 के लिए **₹0.11 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के **₹3.08 करोड़** के नुकसान से एक बड़ा टर्नअराउंड है। कंपनी का रेवेन्यू **₹46.80 करोड़** रहा, लेकिन सब्सिडीरी India Denim Limited के इन्सॉल्वेंसी (CIRP) प्रोसेस में होने से मुश्किलें बरकरार हैं।

मुनाफे का गणित और जमीनी हकीकत

कंपनी ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की रिपोर्ट में ₹0.11 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट पेश किया है। पिछले साल कंपनी को ₹3.08 करोड़ का नुकसान हुआ था, जिसे देखते हुए यह राहत की खबर है। हालांकि, स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹46.80 करोड़ पर स्थिर बना हुआ है।

क्यों नहीं मिल रही कंसोलिडेटेड रिपोर्ट?

कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती इसकी सब्सिडीरी India Denim Limited है, जो सितंबर 2023 से कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के अधीन है। इस वजह से कंपनी कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स पेश करने में असमर्थ है, जो शेयरहोल्डर्स के लिए चिंता का विषय है।

गवर्नेंस पर उठे सवाल

सेक्रेटेरियल ऑडिट रिपोर्ट में दो बड़ी कमियां उजागर हुई हैं:

  • लोन विवाद: सब्सिडीरी को बिना किसी स्पष्ट रिपेमेंट शर्तों के 'इंटरेस्ट-फ्री लोन' दिया गया, जो 'कंपनीज एक्ट, 2013' की धारा 186(7) का उल्लंघन है।
  • नियमों की अनदेखी: SEBI के LODR रेगुलेशंस के तहत कंसोलिडेटेड नतीजे दाखिल न कर पाने पर सवाल खड़े हुए हैं। कंपनी का तर्क है कि सब्सिडीरी के सस्पेंडेड बोर्ड से सहयोग न मिलने के कारण यह संभव नहीं हो सका।

आगे की राह

फिलहाल मैनेजमेंट सब्सिडीरी के इन्सॉल्वेंसी केस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहा है। जब तक वहां से कोई फैसला नहीं आता, तब तक कंपनी के निवेश और कंसोलिडेटेड आंकड़ों को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी। निवेशकों को अब सुप्रीम कोर्ट के अपडेट्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.