Gaekwar Mills के लिए FY 2025-26 काफी मुश्किल भरा रहा है। कंपनी को **₹9.45 करोड़** का नेट लॉस हुआ है और उसका कामकाज पूरी तरह बंद है। अब कंपनी अपना अस्तित्व बचाने के लिए बिलिमोरा (Bilimora) स्थित अपनी जमीन को बेचकर फंड जुटाने की तैयारी कर रही है।
फाइनेंशियल संकट और मौजूदा स्थिति
वित्तीय वर्ष 2025-26 में Gaekwar Mills की हालत खस्ता है। कंपनी का नेट लॉस पिछले साल के ₹4.42 करोड़ से बढ़कर ₹9.45 करोड़ पर पहुंच गया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू पूरी तरह से शून्य है। लेबर विवाद और महाराष्ट्र-गुजरात हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमों के कारण मिलें लंबे समय से बंद पड़ी हैं।
कैश की किल्लत और कंप्लायंस पर असर
कंपनी के पास कैश और कैश इक्विवेलेंट के नाम पर मात्र ₹5 लाख बचे हैं। फंड की कमी के चलते कंपनी NSDL की फीस तक नहीं भर पा रही है और रेगुलेटरी फाइलिंग में भी देरी हो रही है। रेवेन्यू के नाम पर केवल ₹0.58 करोड़ की 'अन्य इनकम' (Other Income) ही सहारा है।
नई रणनीति: रियल एस्टेट की ओर कदम
टेक्सटाइल बिजनेस से हार मानने के बाद, अब मैनेजमेंट ने रियल एस्टेट में उतरने का फैसला किया है। बिलिमोरा में मौजूद अपनी जमीन का 60% हिस्सा डेवलप करके कंपनी फंड जुटाएगी। इस रकम का इस्तेमाल Mukesh Babu Financial Services Ltd के डिबेंचर्स को चुकाने में किया जाएगा, जिनकी मैच्योरिटी बढ़ाकर 31 मार्च 2028 कर दी गई है और उन्हें 40% प्रीमियम पर रिडीम किया जाएगा।
गवर्नेंस और आगे का रास्ता
फिलहाल कंपनी ने श्वेता ध्रुव शाह को होल-टाइम डायरेक्टर के तौर पर री-अपॉइंट करने का प्रस्ताव रखा है, जो मुनाफा वापस आने तक बिना किसी सैलरी (NIL Remuneration) के काम करेंगी। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या कंपनी अपनी जमीन को समय पर कैश में बदल पाती है और कोर्ट के मामलों का क्या नतीजा निकलता है।
