Department of Telecommunications (DoT) ने Reliance Communications और Reliance Telecom के स्पेक्ट्रम लाइसेंस को रद्द कर दिया है। पेमेंट डिफॉल्ट और नियमों के उल्लंघन के चलते उठाए गए इस कदम से कंपनी की NCLT में चल रही इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया पर बड़ा असर पड़ेगा।
लाइसेंस रद्द होने की वजह
सरकार के इस फैसले की जड़ में 2010 से 2016 के बीच हुई नीलामी में खरीदे गए स्पेक्ट्रम हैं। DoT के मुताबिक, कंपनी न तो स्पेक्ट्रम के उपयोग के लिए जरूरी नियमों (roll-out obligations) का पालन कर पाई और न ही स्पेक्ट्रम यूसेज चार्जेस, लिक्विडेटेड डैमेज और किस्तों का समय पर भुगतान किया। यह फैसला 13 फरवरी, 2026 को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है।
NCLT प्रक्रिया पर सीधा प्रहार
Reliance Communications फिलहाल Corporate Insolvency Resolution Process (CIRP) से गुजर रही है। कंपनी का जो रेजोल्यूशन प्लान तैयार किया गया था, उसमें ये स्पेक्ट्रम एसेट्स वैल्युएशन का एक मुख्य हिस्सा थे। अब इन संपत्तियों के सरकार के पास वापस चले जाने से लेनदारों (creditors) के लिए रिकवरी की राह और कठिन हो गई है। कंपनी को तुरंत प्रभाव से इन स्पेक्ट्रम से जुड़ी सभी वायरलेस सेवाएं बंद करने का आदेश दिया गया है।
अब आगे क्या?
यह मामला फिलहाल NCLT, मुंबई में लंबित है। स्पेक्ट्रम के रूप में एक बड़ी संपत्ति के छिन जाने के बाद, अब रेजोल्यूशन प्रोफेशनल को पूरी रणनीति पर दोबारा काम करना होगा। शेयरधारकों और लेनदारों के लिए आने वाली NCLT की सुनवाई बेहद अहम होगी, क्योंकि वहां से ही पता चलेगा कि कंपनी की वैल्यू पर इसका कितना बड़ा असर पड़ता है।
