iCodex Publishing Solutions ने FY26 के नतीजों का ऐलान कर दिया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट घटकर **₹7.09 करोड़** रह गया है, जबकि पिछले साल यह **₹8.95 करोड़** था। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर **₹25.93 करोड़** तक पहुंच गया है।
नतीजों का लेखा-जोखा
कंपनी के नतीजों में टॉप-लाइन और बॉटम-लाइन के बीच बड़ा अंतर दिखा है। जहां एक ओर रेवेन्यू पिछले साल के ₹21.87 करोड़ से बढ़कर ₹25.93 करोड़ हो गया है, वहीं दूसरी ओर मुनाफे पर दबाव साफ है। इसका मुख्य कारण एम्प्लॉई बेनिफिट खर्च का दोगुना होकर ₹11.41 करोड़ तक पहुंचना रहा है। अब कंपनी अपनी पहचान को नए रूप में ढालने के लिए नाम बदलकर 'iCodex Limited' करने की तैयारी में है, जो इसके 'Digital Research Infrastructure' मॉडल में शिफ्ट होने का संकेत है।
AI की ओर कंपनी का रुख
कंपनी अब अपना पूरा ध्यान 'Agentic AI' और रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगा रही है। इसके तहत EAssistant+ और JSLD जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कंपनी ने ₹7.46 करोड़ का कैपिटल वर्क-इन-प्रोग्रेस (CWIP) निवेश किया है। यह भविष्य की ग्रोथ के लिए कंपनी का बड़ा दांव है।
गवर्नेंस और रिस्क फैक्टर
निवेशकों को कंपनी के गवर्नेंस ट्रैक रिकॉर्ड पर भी नजर रखनी होगी। हालिया सेक्रेटेरियल ऑडिट में कुछ खामियां पाई गई हैं, जैसे कि KMP इस्तीफों के डिस्क्लोजर में देरी, रजिस्टर ऑफ कॉन्ट्रैक्ट्स का रखरखाव न होना और स्ट्रक्चर्ड डिजिटल डेटाबेस (SDD) को अपडेट करने में हुई चूक। हालांकि मैनेजमेंट ने इन्हें 'प्रोसिजरल' (प्रक्रियात्मक) कमियां बताया है, लेकिन निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है।
आगे देखना यह होगा कि क्या एम्प्लॉई कॉस्ट में हुआ यह उछाल केवल नए AI टैलेंट के लिए एक निवेश है, या यह कंपनी के मार्जिन्स पर लंबे समय तक बोझ बना रहेगा।
