Trigyn Technologies का नेट प्रॉफिट 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही में शानदार ढंग से बढ़कर **₹12.59 करोड़** पर पहुंच गया है। हालांकि, ऑडिट रिपोर्ट में **₹80 करोड़** की अनबुक्ड रेवेन्यू और पेंडिंग टैक्स डिमांड्स की चिंताएं निवेशकों के लिए एक बड़ा 'रेड फ्लैग' बनी हुई हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
कंपनी के रेवेन्यू में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। Q2 FY2027 में रेवेन्यू बढ़कर ₹282.85 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹241.95 करोड़ था। वहीं, नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹5.27 करोड़ से बढ़कर ₹12.59 करोड़ हो गया है, जो ऑपरेशनल ग्रोथ को दर्शाता है।
ऑडिटर्स की 'चेतावनी'
कंपनी के ऑडिटर्स ने अपनी रिपोर्ट में चार अहम बिंदुओं पर निवेशकों का ध्यान खींचने की कोशिश की है:
- रेवेन्यू रिकग्निशन: वसूली की अनिश्चितता के कारण कंपनी ने ₹80 करोड़ के गारंटीड क्वार्टरली रेवेन्यू को बुक्स में दर्ज ही नहीं किया है।
- GST विवाद: वित्त वर्ष 2019-23 के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ा ₹9.08 करोड़ का डिमांड नोटिस फिलहाल अपील में है।
- इनकम टैक्स: असेसमेंट ईयर 2014-15 से 2019-20 तक के लिए ₹3.14 करोड़ की नई टैक्स डिमांड सामने आई है।
- ऑपरेशनल रिस्क: नासिक का एक टोल प्रोजेक्ट टर्मिनेशन नोटिस और आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) के बीच फंसा है, जहां ₹3.07 करोड़ की लागत दांव पर है।
बोर्ड रूम में बदलाव
कॉर्पोरेट गवर्नेंस के तहत, कंपनी ने अपनी ऑडिट और नॉमिनेशन कमेटियों में फेरबदल किया है। नए सदस्य के तौर पर नरेंद्र भंडारी की नियुक्ति की गई है, जिन्होंने सैयद अहमद सुल्तान और विजय माल्या की जगह ली है।
निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
अब निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी टैक्स विवादों को कैसे सुलझाती है और क्या वह अटके हुए ₹80 करोड़ के रेवेन्यू को हासिल कर पाती है। इसके अलावा, टोल प्रोजेक्ट से जुड़ा कानूनी विवाद कंपनी की वैल्युएशन पर कैसा असर डालेगा, इस पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
