TeamLease Services ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछली तिमाही के **₹34.45 करोड़** से घटकर **₹23.02 करोड़** रह गया है, हालांकि कंपनी ने **114** नए क्लाइंट्स जोड़ने के साथ रेवेन्यू में मामूली बढ़त दर्ज की है।
कारोबार का हाल और रणनीतिक बदलाव
सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर ₹3,076 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही में ₹3,035 करोड़ था। कंपनी ने अपने ऑपरेशंस को स्ट्रीमलाइन करने के लिए Crystal HR में अपनी 30% हिस्सेदारी को ₹10.12 करोड़ में प्रमोटर्स को बेच दिया है। वहीं, जुलाई 2026 में कंपनी ने ₹240.78 करोड़ का शेयर बायबैक सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो शेयरहोल्डर्स के लिए वैल्यू क्रिएशन की दिशा में एक कदम है।
कानूनी पचड़ों में फंसी कंपनी
नतीजों के साथ-साथ ऑडिटर्स ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। कंपनी पर Regional Provident Fund Department की ओर से ₹3.95 करोड़ का दावा किया गया है। यह विवाद 2014-2022 की अवधि के दौरान NEEM ट्रेनीज को EPF एक्ट के दायरे में लाने को लेकर है। TeamLease ने इसे गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी है और फिलहाल कंपनी ने इस पर कोई प्रोविजन नहीं बनाया है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों को अब कोर्ट के फैसले पर नजर रखनी होगी। हालांकि रेवेन्यू ग्रोथ बरकरार है, लेकिन बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों के चलते मार्जिन पर दबाव दिख रहा है। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि कंपनी स्टाफिंग बिजनेस में मार्जिन को कैसे रिकवर करती है।
