Tata Consultancy Services ने US के Permanent Labor Certification Program (PERM) में हुए हालिया बदलावों पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। कंपनी ने कहा है कि उनका कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि पिछले दो सालों में उन्होंने इसके जरिए **10** से भी कम आवेदन किए हैं।
बाजार की चिंता और TCS का जवाब
आईटी सेक्टर में अक्सर वीजा और लेबर रेगुलेशन से जुड़ी खबरें निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन जाती हैं। हालांकि, TCS ने साफ किया है कि US डिपार्टमेंट ऑफ लेबर के हालिया बदलावों का उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी ने पुष्टि की है कि उनकी डिपेंडेंसी इस प्रोग्राम पर न्यूनतम है।
लोकल हायरिंग पर फोकस
TCS के ऑपरेशनल मॉडल में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कंपनी पूरे अमेरिका में अपने 31 डिलीवरी सेंटर्स के माध्यम से काम करना जारी रखेगी। मैनेजमेंट ने अपनी लोकल हायरिंग स्ट्रैटेजी को फिर से दोहराया है, जिसके तहत अगले 5 वर्षों में 15,000 नए कर्मचारियों को US मार्केट में भर्ती किया जाएगा।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
भले ही PERM प्रोग्राम से कंपनी को कोई खतरा नहीं है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों को भविष्य में US की इमिग्रेशन पॉलिसी और वीजा कोटा के नियमों पर नजर रखनी चाहिए। यह किसी भी ग्लोबल आईटी कंपनी के लिए एक सामान्य इंडस्ट्री रिस्क बना रहता है।
