Southern Infoconsultants Limited के FY26 के नतीजे बेहद निराशाजनक रहे हैं। कंपनी को **₹0.15 करोड़** का नेट लॉस हुआ है। ऑडिटर्स ने ग्रैच्युटी प्रावधानों में कमी और इन्वेंट्री डॉक्यूमेंटेशन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसके चलते डिविडेंड भी नहीं दिया गया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का हाल
कंपनी ने अपने 32वें एनुअल रिपोर्ट में बताया कि FY26 में उनका स्टैंडअलोन रेवेन्यू घटकर ₹10.71 करोड़ रह गया है, जो पिछले साल ₹13.05 करोड़ था। कंपनी, जिसे पहले 'Southern Infosys Limited' के नाम से जाना जाता था, अब घाटे में आ गई है। इसका मुख्य असर EPS पर पड़ा है, जो 0.54 से गिरकर -0.31 पर आ गया है।
ऑडिटर्स की 'Qualified Opinion' क्यों?
ऑडिटर्स ने कंपनी की बैलेंस शीट पर बड़े सवाल उठाए हैं:
- ग्रैच्युटी में कमी: कानूनी रूप से जरूरी ग्रैच्युटी प्रावधानों (Gratuity provisions) को पूरा नहीं किया गया है, जिससे कंपनी का असल घाटा और भी ज्यादा हो सकता है।
- इन्वेंट्री का वेरिफिकेशन नहीं: करीब ₹4.44 करोड़ की 'वर्क-इन-प्रोग्रेस' इन्वेंट्री का कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
आगे क्या होगा?
मैनेजमेंट अब ई-कॉमर्स पोर्टल शुरू करके ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है, लेकिन कैश की किल्लत के कारण इस साल डिविडेंड देने से मना कर दिया गया है। ट्रेड रिसीवेबल्स और एमएसएमई (MSME) वेंडर वेरिफिकेशन में कमी भी कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे कंपनी के जवाब का इंतजार करें कि इन ऑडिट आपत्तियों को कैसे सुधारा जाएगा।
