Silver Touch Technologies ने FY26 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट **66.47%** बढ़कर **₹37.77 करोड़** हो गया है। साथ ही, कंपनी ने **1:1** के बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट का भी ऐलान किया है।
कैसे आया इतना मुनाफा?
Silver Touch Technologies लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी ने पिछले साल के मुकाबले जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। स्टैंडअलोन रेवेन्यू 18.19% बढ़कर ₹315.13 करोड़ हुआ, वहीं स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 66.47% की छलांग लगाकर ₹37.77 करोड़ पर पहुंच गया। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 18.59% बढ़कर ₹341.99 करोड़ रहा और कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 60.95% की तेजी से ₹35.73 करोड़ दर्ज किया गया।
शेयरधारकों के लिए क्या है खास?
कंपनी ने शेयरधारकों को तोहफा देते हुए 1:1 के रेशियो में बोनस शेयर देने का ऐलान किया है। इसका मतलब है कि आपके पास जितने शेयर हैं, उतने ही बोनस शेयर मिलेंगे। इसके अलावा, कंपनी 10 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयरों को 2 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयरों में स्प्लिट (Stock Split) भी करेगी। ये दोनों कॉर्पोरेट एक्शन मार्च 2026 तक पूरे होने की उम्मीद है।
कंपनी के लिए आगे क्या?
Silver Touch Technologies को एक मिनी-रत्ना PSU से AI प्रोजेक्ट भी मिला है। साथ ही, 'जन रक्षक' प्रोजेक्ट को ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस (O&M) फेज में सफलतापूर्वक ट्रांज़िशन कर दिया गया है। ये कदम कंपनी के लिए भविष्य में लगातार रेवेन्यू और ग्रोथ की उम्मीद जगाते हैं, खासकर AI जैसे हाई-डिमांड वाले टेक्नोलॉजी सेक्टर में।
कंपनी की पिछली परफॉरमेंस
कंपनी की वित्तीय स्थिति लगातार बेहतर हो रही है। पिछले वित्तीय वर्ष (FY25) में, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹22.69 करोड़ था। FY26 में यह भारी उछाल कंपनी के बिजनेस के विस्तार और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में सुधार को दर्शाता है।
किन बातों का रखना होगा ध्यान?
हालाँकि नतीजे शानदार हैं, लेकिन कुछ जोखिम भी हैं। SEBI (PIT) रेगुलेशन और स्ट्रक्चर्ड डिजिटल डेटाबेस (SDD) के रखरखाव में संभावित देरी जैसी मामूली कंप्लायंस संबंधी दिक्कतें सामने आई हैं। इसके अलावा, लगातार बदलती टेक्नोलॉजी के साथ तालमेल बिठाना और कर्मचारियों की स्किलिंग बनाए रखना भी एक चुनौती हो सकती है।
भविष्य की राह
निवेशक अब AI प्रोजेक्ट्स के सफल इम्प्लीमेंटेशन, 'जन रक्षक' प्रोजेक्ट के O&M फेज से होने वाली कमाई और कंपनी के रेगुलेटरी कंप्लायंस पर बारीकी से नज़र रखेंगे। स्टॉक स्प्लिट और बोनस इश्यू के बाद शेयर की लिक्विडिटी और वैल्यूएशन पर पड़ने वाले असर पर भी सबकी निगाहें होंगी।
