Shiprocket Limited ने लिस्टिंग के बाद अपनी पहली सालाना रिपोर्ट पेश की है। कंपनी का रेवेन्यू **24%** बढ़कर **₹2,024.1 करोड़** पहुंच गया है। हालांकि कंपनी को **₹79.2 करोड़** का घाटा हुआ है, लेकिन अच्छी बात यह है कि कंपनी का नेट ऑपरेटिंग कैश फ्लो **₹52.6 करोड़** के स्तर पर पॉजिटिव हो गया है।
मुनाफे का गणित और कोर बिजनेस
कंपनी के मुख्य घरेलू शिपिंग बिजनेस ने 73.4% रेवेन्यू में योगदान दिया है, जिसका एडजस्टेड EBITDA मार्जिन 12.6% रहा। कंपनी के एक्टिव मर्चेंट्स की संख्या 30% बढ़कर 2,14,769 पर पहुंच गई है, जो इनके प्लेटफॉर्म की पकड़ को मजबूत दिखाता है।
नई योजनाओं पर खर्च और रिस्क
जहां कोर शिपिंग बिजनेस मुनाफे में है, वहीं कंपनी के 'इमर्जिंग बिजनेस' सेगमेंट (जैसे Martech और ओमनीचैनल) में ₹169 करोड़ का एडजस्टेड EBITDA घाटा देखा गया है। इन नए सेगमेंट्स में भारी निवेश के कारण ही कंपनी अभी भी नेट लॉस में है।
ऑडिटिंग में बदलाव
कंपनी अपनी आगामी 15वीं AGM में B S R & Co. LLP को अपना नया ऑडिटर नियुक्त करने वाली है, जिसका कार्यकाल 5 साल का होगा। यह बदलाव फाइनेंशियल ईयर 2030-31 तक जारी रहेगा।
कुल मिलाकर, शिपिंग के दम पर ग्रोथ तो दिख रही है, लेकिन नए वर्टिकल्स को जल्द मुनाफे में लाना कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
