Punjab Communications Limited ने FY26 में **₹2.98 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज कर शानदार वापसी की है। पिछले साल कंपनी घाटे में थी, लेकिन इस बार **62%** रेवेन्यू ग्रोथ देखी गई है। हालांकि, ऑडिट रिपोर्ट में इंटरनल कंट्रोल और इन्वेंट्री वैल्यूएशन को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।
मुनाफे में वापसी और रेवेन्यू का गणित
कंपनी ने बीते फाइनेंशियल ईयर में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। रेवेन्यू ₹17.21 करोड़ से बढ़कर ₹26.85 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। इस ग्रोथ में Power Line Carrier Communication (PLCC) इक्विपमेंट की भारी मांग का बड़ा हाथ रहा। कंपनी के कुल टर्नओवर का 56% हिस्सा पावर सेक्टर और रेलवे से आया है। पिछले साल जहां कंपनी को ₹0.38 करोड़ का नुकसान हुआ था, वहीं अब वह मुनाफे में है।
ऑडिटर की चिंताएं: निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क
मुनाफे की खबर के बीच ऑडिट रिपोर्ट में कुछ बातें निवेशकों की नींद उड़ा सकती हैं:
- इंटरनल कंट्रोल में कमजोरी: ऑडिटर ने कंपनी के फाइनेंशियल कंट्रोल सिस्टम में कमियां पाई हैं, खासकर इन्वेंट्री वैल्यूएशन और ओवरहेड्स के बंटवारे को लेकर।
- ECL पॉलिसी का अभाव: कंपनी के पास 'Expected Credit Loss' (ECL) पॉलिसी नहीं है, जो अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स के हिसाब से जरूरी है।
- पुराना बकाया: कंपनी के ट्रेड रिसीवेबल्स और पेबल्स में ऐसी एंट्रीज हैं जो 3 साल से ज्यादा पुरानी हैं, जिससे डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
आगे की राह और रिस्क फैक्टर
मैनेजमेंट ने सुधार के लिए कदम उठाए हैं, जैसे 'इन्वेंट्री स्क्रैप कमेटी' का गठन और पेंडिंग कर्जदारों के मामलों को सुलझाने के लिए एक्सपर्ट्स की नियुक्ति। हालांकि, निवेशकों को पंजाब सरकार के विनिवेश (Disinvestment) प्रोसेस और सब्सिडियरी कंपनी Punjab Digital Industrial Systems Ltd (PDISL) के लिक्विडेशन पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। ये दोनों ही मामले कंपनी के भविष्य के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं।
