Punjab Communications ने CAG के निर्देश पर FY26 की रिवाइज्ड ऑडिट रिपोर्ट फाइल की है। हालांकि फाइनेंशियल आंकड़ों में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन ऑडिटर ने अब भी 'Qualified Opinion' जारी रखा है, जिसका मतलब है कि कंपनी के इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल्स और अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स में अभी भी गंभीर खामियां हैं।
क्या है पूरा मामला?
Punjab Communications ने अपनी फाइनेंशियल ईयर 2026 की रिवाइज्ड इंडिपेंडेंट ऑडिट रिपोर्ट जमा की है। यह संशोधन मुख्य रूप से CAG के निर्देशों के बाद किया गया है ताकि कंपनीज एक्ट 2013 की धारा 143(5) के तहत अनिवार्य खुलासे (disclosures) किए जा सकें। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इससे पहले जारी किए गए फाइनेंशियल नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
ऑडिटर क्यों संतुष्ट नहीं?
ऑडिटर M/s Charanjit Singh & Associates ने फाइनेंशियल बुक्स पर फिर से 'Qualified Opinion' दिया है। इसके पीछे मुख्य कारण ये हैं:
- इन्वेंटरी वैल्यूएशन: कंपनी FIFO (फर्स्ट इन फर्स्ट आउट) के बजाय 'लास्ट परचेस रेट' का इस्तेमाल कर रही है, जो Ind AS 2 मानकों का उल्लंघन है।
- क्रेडिट लॉस: ट्रेड रिसीवेबल्स के लिए कोई औपचारिक 'Expected Credit Loss' (ECL) पॉलिसी नहीं है।
- इंटरनल कंट्रोल्स: बैंक रिकॉन्सिलिएशन और ओवरहेड एलोकेशन में गंभीर खामियां पाई गई हैं।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
पिछले साल यानी FY2025 में कंपनी को 'Adverse Opinion' मिला था, जिसके मुकाबले इस बार स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है। कंपनी के ऊपर 3 साल से ज्यादा पुराने ट्रेड रिसीवेबल्स और पेबल्स का भारी बोझ है। ऑडिटर ने कंपनी को ऐतिहासिक घाटे के बावजूद 'Deferred Tax Assets' (DTA) पर बहुत अधिक निर्भर न रहने की चेतावनी दी है।
आगे देखना होगा कि कंपनी मैनेजमेंट कब तक अपनी अकाउंटिंग पॉलिसीज को दुरुस्त करता है और लंबे समय से लंबित पेंडिंग पेमेंट मामलों को कैसे सुलझाता है।
