Persistent Systems ने 3 अगस्त 2026 को होने वाली अपनी 36वीं AGM में Nagarro SE के अधिग्रहण पर मुहर लगाने की तैयारी कर ली है। इस सौदे का मूल्य लगभग ₹13,635 करोड़ है। साथ ही, कंपनी ने FY 2025-26 के लिए प्रति शेयर ₹40 के कुल डिविडेंड का प्रस्ताव भी दिया है।
Persistent Systems का बड़ा प्लान: Nagarro SE पर ₹13,635 करोड़ की बोली
Persistent Systems लिमिटेड शेयरधारकों की मंजूरी के लिए तैयार है। कंपनी अपनी 36वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में, जो 3 अगस्त 2026 को निर्धारित है, Nagarro SE के 100% अधिग्रहण के प्रस्ताव पर वोटिंग कराएगी। इस अधिग्रहण का एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹13,635 करोड़ (1.27 बिलियन EUR) आंका गया है।
इस बड़े सौदे को फाइनेंस करने के लिए, Persistent Systems एक ब्रिज फाइनेंसिंग फैसिलिटी के तहत लगभग ₹15,031 करोड़ जुटाएगी। कंपनी ने इस सुविधा के लिए ₹16,534 करोड़ की कॉरपोरेट गारंटी भी प्रदान की है।
शेयरधारकों को ₹40 प्रति शेयर डिविडेंड का तोहफा
अधिग्रहण की योजना के साथ-साथ, कंपनी ने FY 2025-26 के लिए प्रति इक्विटी शेयर ₹40 के कुल डिविडेंड की सिफारिश की है। इसमें ₹22 का अंतरिम डिविडेंड और ₹18 का फाइनल डिविडेंड शामिल है। फाइनल डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 27 जुलाई, 2026 तय की गई है।
यह डील क्यों है खास?
Nagarro SE का यह अधिग्रहण Persistent Systems के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम है। इसका मकसद एक ट्रांस-अटलांटिक AI-लेड डिजिटल इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म तैयार करना है। उम्मीद है कि इससे कंपनी की यूरोप में मौजूदगी बढ़ेगी और AI क्षमताओं में भी मजबूती आएगी। यह डिविडेंड भुगतान कंपनी के मजबूत फाइनेंशियल हेल्थ और शेयरधारकों को रिटर्न देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कंपनी की पिछली परफॉरमेंस
FY 2025-26 में, Persistent Systems ने भारतीय रुपये में 23.5% का शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज किया था। साथ ही, कंपनी ने 15.6% के EBIT मार्जिन और 12.6% के PAT मार्जिन के साथ मजबूत प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखी। यह मजबूत परफॉरमेंस इस महत्वाकांक्षी अधिग्रहण के लिए फाइनेंशियल आधार प्रदान करती है।
क्या बदलेगा आगे?
अगर यह डील मंजूर हो जाती है, तो Persistent Systems का स्केल और मार्केट प्रेजेंस, खासकर यूरोप में, काफी बढ़ जाएगा। यह AI-लेड डिजिटल इंजीनियरिंग मॉडल की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। कंपनी का लीवरेज भी बढ़ेगा, मैनेजमेंट के अनुसार अधिग्रहण के बाद नेट लीवरेज रेशियो 1.9x और 2.5x के बीच रहने का अनुमान है।
जोखिमों पर एक नज़र
इस अधिग्रहण से जुड़े मुख्य जोखिमों में कर्ज के जरिए फाइनेंसिंग के कारण बढ़ा हुआ लीवरेज, एक बड़े क्रॉस-बॉर्डर एंटिटी को इंटीग्रेट करने में संभावित एग्जीक्यूशन रिस्क और विभिन्न रेगुलेटरी अप्रूवल की आवश्यकता शामिल है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को Nagarro SE के अधिग्रहण और संबंधित फाइनेंसिंग रेजोल्यूशन पर AGM वोटिंग के नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। अधिग्रहण के बाद, नेट लीवरेज रेशियो, सिनर्जी रियलाइजेशन और FY30 टारगेट्स की ओर डी-लीवरेजिंग की प्रगति को ट्रैक करना महत्वपूर्ण होगा।
