आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Persistent Systems ने फंड जुटाने की बड़ी तैयारी कर ली है। कंपनी के बोर्ड ने **$1.25 बिलियन** तक की राशि जुटाने को मंजूरी दे दी है, जिसे डेट और इक्विटी-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए हासिल किया जाएगा।
क्या है कंपनी की स्ट्रैटेजी?
Persistent Systems लिमिटेड के बोर्ड ने अपनी 2 सितंबर, 2026 की बैठक में एक बड़े कैपिटल-रेजिंग एक्सरसाइज को हरी झंडी दी है। कंपनी का इरादा कुल $1.25 बिलियन की लिमिट के साथ फंड जुटाने का है। इसमें लंबी अवधि का डेट (ECBs या NCDs के जरिए) और इक्विटी-लिंक्ड विकल्प (जैसे QIP या FCCBs) शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी ने भविष्य में शेयर जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अपने 'Articles of Association' में भी बदलाव को मंजूरी दी है।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?
यह फैसला कंपनी की बैलेंस शीट को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे मैनेजमेंट को बाजार में अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए तेजी से फंड जुटाने की फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। जानकारों का मानना है कि इस पूंजी का उपयोग बड़ी एक्विजिशन (Acquisitions) या ऑपरेशनल विस्तार के लिए किया जा सकता है।
रिस्क और आगे का रास्ता
निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि अगर कंपनी इक्विटी-लिंक्ड विकल्पों का चुनाव करती है, तो मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी में डाइल्यूशन (Dilution) का खतरा हो सकता है। हालांकि, डेट लेने पर ब्याज का बोझ भी बढ़ेगा।
अब सबकी नजरें कंपनी की आगामी एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) पर टिकी हैं, जहां शेयरधारकों की अंतिम मंजूरी अनिवार्य होगी। निवेशकों को अब EGM के नोटिस और फंड जुटाने की टाइमिंग पर नजर रखनी चाहिए।
