Persistent Systems का बड़ा दांव: एस्टोनियाई कंपनी का किया अधिग्रहण, जानें क्यों है खास

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Persistent Systems का बड़ा दांव: एस्टोनियाई कंपनी का किया अधिग्रहण, जानें क्यों है खास
Overview

Persistent Systems अपनी सब्सिडियरी PerSys Estonia OÜ के ज़रिए एस्टोनिया की Concise Systems OÜ के बिज़नेस का हिस्सा **5.6 मिलियन यूरो** में अधिग्रहित करेगी। इस कदम से क्लाइंट रिलेशनशिप मज़बूत होंगे, डिलीवरी का जोखिम कम होगा और पूर्वी यूरोप में कंपनी की उपस्थिति बढ़ेगी।

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Persistent Systems का बड़ा अधिग्रहण!

भारतीय आईटी सर्विस कंपनी Persistent Systems ने एस्टोनिया की एक कंपनी Concise Systems OÜ के बिज़नेस का एक हिस्सा खरीदने का ऐलान किया है। यह डील 5.6 मिलियन यूरो (लगभग ₹50 करोड़) में हुई है और इसे Persistent Systems की एस्टोनियाई सब्सिडियरी PerSys Estonia OÜ के ज़रिए पूरा किया जाएगा।

क्यों है यह डील खास?

इस अधिग्रहण का मुख्य मकसद एक अहम क्लाइंट के साथ अपने संबंधों को और मज़बूत करना है। अभी तक Persistent Systems इस क्लाइंट को सब-कॉन्ट्रैक्टिंग के ज़रिए सेवाएं दे रही थी, लेकिन अब इस डील के बाद कंपनी सीधे तौर पर डिलीवरी संभालेगी। इससे लंबी अवधि में डिलीवरी को लेकर जो जोखिम था, वह कम हो जाएगा। साथ ही, यह पूर्वी यूरोप में Persistent Systems की 'नियरशोर' (Nearshore) उपस्थिति को भी बढ़ाएगा।

पुरानी व्यवस्था क्या थी?

Concise Systems OÜ का वह हिस्सा जिसे Persistent Systems खरीद रही है, वह पहले से ही Persistent Systems के साथ सब-कॉन्ट्रैक्टिंग के तहत काम कर रहा था। अब कंपनी इस बिज़नेस को अपने नियंत्रण में लेकर डायरेक्ट डिलीवरी मॉडल पर लाएगी।

अब क्या बदलेगा?

इस अधिग्रहण से Persistent Systems को नई डिलीवरी क्षमताएं मिलेंगी और नए कर्मचारी भी जुड़ेंगे। इससे कंपनी को अपने प्रमुख क्लाइंट के लिए सर्विस क्वालिटी और ऑपरेशनल कंट्रोल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। कंपनी को उम्मीद है कि इससे यूरोपीय आईटी सर्विस मार्केट में उसकी पैठ और मज़बूत होगी।

किन बातों का रखना होगा ध्यान?

निवेशकों को यह देखना होगा कि अधिग्रहण किया गया बिज़नेस कितनी अच्छी तरह से इंटीग्रेट (Integrate) होता है और क्या यह डिलीवरी को स्थिर बनाने और क्लाइंट संतुष्टि के लक्ष्यों को पूरा करता है।

रेवेन्यू और पेमेंट डिटेल्स

जिस बिज़नेस का अधिग्रहण किया गया है, वह सालाना 11.6 मिलियन यूरो (लगभग ₹103 करोड़) का रेवेन्यू जेनरेट करता है। कुल खरीद कीमत 5.6 मिलियन यूरो है, जिसमें से 1.5 मिलियन यूरो का भुगतान अगले दो सालों में किश्तों में किया जाएगा। यह डील अगले 4 से 8 हफ्तों में पूरी होने की उम्मीद है।

आगे क्या देखना होगा?

निवेशकों को अधिग्रहण किए गए बिज़नेस के सफल इंटीग्रेशन और Persistent Systems की डिलीवरी क्षमताओं पर इसके असर पर नज़र रखनी चाहिए। खासकर उस अहम क्लाइंट के साथ संबंधों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, पूर्वी यूरोप में कंपनी का विस्तार भी एक बड़ा पॉइंट रहेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.