Omega Interactive Technologies ने FY26 में **₹149.25 करोड़** का भारी-भरकम रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल महज **₹0.02 करोड़** था। हालांकि, कंपनी गंभीर गवर्नेंस खामियों के घेरे में है, जिसमें **जनवरी 2025** से CFO का पद खाली होना और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की अयोग्यता जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस: एक नजर में
कंपनी ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹3.04 करोड़ रहा है, जबकि FY25 में यह ₹1.19 करोड़ था। कंपनी का दावा है कि यह ग्रोथ AI हेल्थकेयर, प्रीशियस मेटल्स ट्रेडिंग और फिल्म प्रोडक्शन जैसे नए वर्टिकल्स में कदम रखने की वजह से आई है।
गवर्नेंस पर गंभीर संकट
अति-उत्साह वाली इस ग्रोथ के साथ ही कंपनी की 'सेक्रेटेरियल ऑडिट रिपोर्ट' ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है:
- CFO की कमी: कंपनी जनवरी 2025 से बिना किसी चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) के काम कर रही है।
- बोर्ड की खामियां: कंपनी का बोर्ड कंपोजिशन SEBI और 'Companies Act' के नियमों को पूरा नहीं करता है।
- डायरेक्टर पर विवाद: एक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर को बोर्ड के अन्य सदस्य के साथ पारिवारिक संबंध होने के कारण 'अयोग्य' (Ineligible) पाया गया है।
- डेटाबेस की कमी: कंपनी अनिवार्य डिजिटल डेटाबेस को बनाए रखने में भी विफल रही है।
आगे क्या होगा?
कंपनी ने अपना रजिस्टर्ड ऑफिस ROC मुंबई से ROC पुणे शिफ्ट करने का फैसला लिया है। साथ ही, 29 जुलाई 2026 से मिस्टर लोकेश कुमार और मिस्टर राहुल रात्रा को एडिशनल नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया है। अब सभी की निगाहें 29 सितंबर 2026 को होने वाली 32वीं AGM (Annual General Meeting) पर टिकी हैं, जहां इन कंप्लायंस खामियों पर तीखे सवाल पूछे जा सकते हैं।
निवेशकों को सलाह है कि वे SEBI की अगली कार्रवाई और CFO की नियुक्ति पर नजर बनाए रखें, क्योंकि वेबसाइट और फाइलिंग से जुड़ी लापरवाही आगे चलकर पेनल्टी का कारण बन सकती है।
