Jolly Plastic Industries ने अपना नाम बदलकर Sahaj Digital Limited कर लिया है. कंपनी अब प्लास्टिक ट्रेडिंग से हटकर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, AI और फिनटेक में कदम रख रही है. नए निवेशक Bhaum Digital Ventures ने प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के बाद **72.61%** हिस्सेदारी हासिल की है.
Jolly Plastic से Sahaj Digital का सफर
Jolly Plastic Industries Ltd अब Sahaj Digital Limited के नाम से पहचानी जाएगी. कंपनी अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव ला रही है. अब यह प्लास्टिक और पॉलीमर ट्रेडिंग से निकलकर टेक्नोलॉजी-फोकस्ड डिजिटल सर्विसेज की दुनिया में कदम रख रही है. कंपनी का लक्ष्य सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ई-गवर्नेंस और फिनटेक के क्षेत्र में काम करना है.
क्या हुआ है?
Jolly Plastic Industries Ltd ने आधिकारिक तौर पर अपना नाम Sahaj Digital Limited कर लिया है. कंपनी ने Bhaum Digital Ventures Private Limited से एक स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट हासिल किया है. Bhaum Digital Ventures ने ₹10 प्रति शेयर के भाव पर 1.77 करोड़ इक्विटी शेयर्स सब्सक्राइब किए हैं, जिससे कंपनी में उनकी 72.61% हिस्सेदारी हो गई है.
क्यों है यह अहम?
नाम बदलने और इस नए निवेश से कंपनी की बिजनेस दिशा पूरी तरह बदल गई है. Sahaj Digital अब सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, AI, ई-गवर्नेंस और फिनटेक पर ध्यान केंद्रित करेगी. कंपनी एक B2B और B2C 'सुपर ऐप' (Super App) भी लॉन्च करने की योजना बना रही है. इस बदलाव से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम (dilution) हो गई है और वे एक नए सेक्टर में प्रवेश कर रहे हैं.
पुरानी कहानी
पहले प्लास्टिक और पॉलीमर के कारोबार में लगी यह कंपनी अब क्लाउड कंप्यूटिंग, AI-संचालित समाधान, डिजिटल कॉमर्स, वित्तीय समावेशन (financial inclusion) और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में सक्रिय होगी. यह बदलाव Sahaj Retail Limited के साथ हुए शेयर स्वैप एग्रीमेंट के बाद आया है.
आगे क्या बदलेगा?
कंपनी में एक नई मैनेजमेंट टीम नियुक्त की गई है, जिसमें श्री शोमिक कुमार मुखर्जी (Mr. Shomik Kumar Mukerjee) को मैनेजर बनाया गया है. नए डायरेक्टर्स में श्री सुवेंदु चुंदर (Mr. Suvendu Chunder), श्री अनंजन मित्रा (Mr. Ananjan Mitter) और श्री कमल नैन पांड्या (Mr. Kamal Nain Pandya) शामिल हैं. कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस गुजरात से वेस्ट बंगाल शिफ्ट किया जा रहा है.
जोखिम पर नज़र
ऑडिटर की एक रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में ऑडिट ट्रेल (edit log) की कमी का उल्लेख किया गया है. मैनेजमेंट ने इसे ठीक करने का वादा किया है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण गवर्नेंस का मुद्दा है जिस पर नजर रखनी होगी.
साथियों से तुलना
जैसे-जैसे Sahaj Digital अपने टेक सफर की शुरुआत कर रही है, इसके प्रतिस्पर्धी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और आईटी सर्विसेज सेक्टर की कंपनियां होंगी. यह उसके पिछले प्लास्टिक ट्रेडिंग के कारोबार से बिल्कुल अलग है.
वित्तीय आंकड़े (समय-सीमा के साथ)
वित्तीय वर्ष 2026 (31 मार्च 2026 को समाप्त) के लिए, कंपनी का रेवेन्यू ₹0.23 करोड़ रहा (FY 2025 के ₹0.17 करोड़ से 32.8% ज़्यादा). हालांकि, नेट प्रॉफिट 40.1% घटकर ₹0.01 करोड़ रह गया, जो FY 2025 में ₹0.02 करोड़ था. बेसिक और डाइल्यूटेड EPS 40.0% गिरकर ₹0.0159 हो गया, जो पहले ₹0.0265 था.
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को कंपनी की नई टेक स्ट्रेटेजी के कार्यान्वयन, 'सुपर ऐप' के विकास और नई मैनेजमेंट टीम के ग्रोथ को कैसे आगे बढ़ाने पर नजर रखनी चाहिए. ऑडिटर की रिपोर्ट में बताई गई समस्या का समाधान भी एक महत्वपूर्ण बिंदु होगा.
