IB Infotech Enterprises ने FY26 में दमदार प्रदर्शन किया है। कंपनी की कुल आय **28.46%** बढ़कर **₹8.44 करोड़** हो गई, जबकि नेट प्रॉफिट बढ़कर **₹1.73 करोड़** पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी ने शेयर स्प्लिट भी पूरा किया और बोर्ड में कुछ बदलाव भी हुए।
IB Infotech Enterprises FY26 नतीजों पर एक नज़र
IB Infotech Enterprises Limited ने अपने वित्तीय वर्ष 2025-26 की सालाना रिपोर्ट जारी कर दी है। कंपनी ने ₹8.44 करोड़ की कुल आय दर्ज की, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के ₹6.57 करोड़ की तुलना में 28.46% की बड़ी बढ़ोतरी है। नेट प्रॉफिट में भी शानदार उछाल देखा गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष के ₹0.74 करोड़ से बढ़कर ₹1.73 करोड़ हो गया। FY26 के लिए प्रति शेयर आय (EPS) ₹13.48 रही।
इसके अलावा, कंपनी ने मई 2026 में 1:10 का शेयर स्प्लिट भी पूरा किया, जिसमें ₹10 के फेस वैल्यू वाले शेयर को ₹1 के फेस वैल्यू वाले शेयरों में बांटा गया। बोर्ड स्तर पर भी कुछ बदलाव हुए, जिसमें मार्च 2026 में श्री जैस्मिन पारेख का डायरेक्टर पद से इस्तीफा और अक्टूबर 2025 में श्री चिन्मय शुक्ला की इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्ति शामिल है। दिसंबर 2025 में सुश्री दिव्या त्रिवेदी को कंपनी सेक्रेटरी भी बनाया गया।
प्रदर्शन क्यों महत्वपूर्ण है?
IB Infotech के लिए यह मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, खासकर 28% से अधिक की रेवेन्यू ग्रोथ और नेट प्रॉफिट का दोगुना से ज्यादा होना, कंपनी की बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्केट में मजबूत पकड़ को दर्शाता है। शेयर स्प्लिट का मकसद निवेशकों के लिए शेयरों को ज्यादा सुलभ बनाना और लिक्विडिटी बढ़ाना है। कंपनी की क्लीन ऑडिट रिपोर्ट भी वित्तीय रिपोर्टिंग में विश्वास बढ़ाती है।
पिछली कहानी
पिछले वित्तीय वर्ष, FY 2024-25 में, IB Infotech ने ₹6.57 करोड़ की कुल आय और ₹0.74 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, जिसका EPS ₹5.79 था। मौजूदा वर्ष के नतीजे एक महत्वपूर्ण सुधार और तेज ग्रोथ की ओर इशारा करते हैं।
आगे क्या?
शेयर स्प्लिट के कारण बढ़ी हुई लिक्विडिटी से IB Infotech के शेयरों में ट्रेडिंग एक्टिविटी बढ़ने की उम्मीद है। डिविडेंड के बजाय मुनाफे को बिज़नेस ऑपरेशन्स में वापस लगाया जाएगा। निवेशक यह देखने के लिए उत्सुक होंगे कि नया नेतृत्व भविष्य की ग्रोथ स्ट्रेटेजी को कैसे आगे बढ़ाता है।
जोखिम
आय चाहने वाले निवेशकों के लिए डिविडेंड का भुगतान न होना एक महत्वपूर्ण बिंदु हो सकता है। इसके अलावा, हाल के बोर्ड और मैनेजमेंट में हुए बदलावों का कंपनी की स्ट्रेटेजिक दिशा और एग्जीक्यूशन पर क्या असर पड़ता है, इस पर नज़र रखनी होगी।
अगले कदम पर क्या देखें?
निवेशकों को शेयर स्प्लिट का मार्केट लिक्विडिटी पर असर, नए नेतृत्व में कंपनी की रणनीति और भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी ट्रेंड्स पर नज़र रखनी चाहिए।
