Eternal Limited (पहले Zomato) ने Q1FY27 के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कन्सॉलिडेटेड एडजस्टेड रेवेन्यू 173% बढ़कर ₹20,648 करोड़ हो गया है। सबसे बड़ी बात, क्विक कॉमर्स सेगमेंट भी अब मुनाफे में आ गया है, जिसने ₹102 करोड़ का EBITDA दर्ज किया है। वहीं, कंपनी का कुल EBITDA 223% बढ़कर ₹555 करोड़ पर पहुंच गया।
Detailed Coverage
Eternal Ltd के Q1FY27 के शानदार नतीजे
- कन्सॉलिडेटेड एडजस्टेड रेवेन्यू: ₹20,648 करोड़
- कन्सॉलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA: ₹555 करोड़
निवेशकों के लिए खास: तेज रेवेन्यू ग्रोथ और क्विक कॉमर्स की प्रॉफिटेबिलिटी अच्छी खबर है, लेकिन कैपिटल इंटेंसिटी और GST मुकदमेबाजी चुनौतियां पेश कर सकती हैं।
क्या हुआ?
Eternal Limited (पहले Zomato Limited) ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1FY27) के अपने नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी ने 173% की जबरदस्त साल-दर-साल ग्रोथ के साथ ₹20,648 करोड़ का कन्सॉलिडेटेड एडजस्टेड रेवेन्यू दर्ज किया है। कन्सॉलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA में भी 223% का बड़ा उछाल आया और यह ₹555 करोड़ रहा।
क्यों अहम है ये नतीजे?
कंपनी की शानदार रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार, खासकर क्विक कॉमर्स सेगमेंट के टर्नअराउंड से पता चलता है कि कंपनी अपनी रणनीति पर बखूबी काम कर रही है। क्विक कॉमर्स से पॉजिटिव EBITDA आना एक बड़ा माइलस्टोन है, क्योंकि यह कंपनी के ग्रोथ का मुख्य इंजन है। हालांकि, इस सेगमेंट में लगने वाली भारी पूंजी (Capital Intensity) और जारी GST मुकदमेबाजी पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।
पुरानी कहानी
Eternal Limited, जिसे पहले Zomato के नाम से जाना जाता था, अपने मुख्य फूड डिलीवरी बिजनेस के साथ-साथ क्विक कॉमर्स ऑपरेशंस का भी तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी ने इस विस्तार के लिए वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स में भारी निवेश किया है। हाल ही में, कंपनी ने अपने मल्टी-बिजनेस फोकस को दर्शाने के लिए Zomato Limited से अपना नाम बदलकर Eternal Limited कर लिया है।
अब क्या बदलेगा?
क्विक कॉमर्स बिजनेस (Blinkit) का प्रॉफिटेबल बनना एक बड़ा बदलाव है। इस सेगमेंट ने ₹102 करोड़ का एडजस्टेड EBITDA हासिल किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹162 करोड़ के नुकसान से काफी बेहतर है। कंपनी ने 200 नए स्टोर जोड़े, जिससे क्विक कॉमर्स स्टोर्स की कुल संख्या 2,443 हो गई।
जोखिम जिस पर नजर रखें
Eternal Limited को डिलीवरी चार्जेज़ से जुड़े GST मुकदमेबाजी के कारण ₹420 करोड़, ₹14 करोड़ और ₹13 करोड़ की संभावित भविष्य की देनदारियों का सामना करना पड़ सकता है, जिनका कंपनी विरोध कर रही है। क्विक कॉमर्स मॉडल में वेयरहाउसिंग के लिए बड़े निवेश की ज़रूरत होती है, और गिग वर्कर्स से जुड़े बदलते नियम भी चिंता का विषय हैं।
पीयर तुलना
Eternal Limited के क्विक कॉमर्स सेगमेंट की ग्रोथ (नवंबर में 86% YoY ग्रोथ) तेजी से बढ़ रहे रैपिड डिलीवरी मार्केट में कई प्लेयर्स से बेहतर है। हालांकि इस तिमाही के खास प्रॉफिटेबिलिटी आंकड़े यहां नहीं दिए गए हैं, क्विक कॉमर्स में पॉजिटिव EBITDA हासिल करना Eternal की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
कुछ अहम आंकड़े (समय-आधारित)
- फूड डिलीवरी (नवंबर): ₹10,769 करोड़ (20% YoY ग्रोथ), 5.6% एडजस्टेड EBITDA मार्जिन के साथ।
- क्विक कॉमर्स (नवंबर): ₹17,132 करोड़ (86% YoY ग्रोथ), ₹102 करोड़ एडजस्टेड EBITDA के साथ।
- गोइंग-आउट (नवंबर): ₹3,218 करोड़ (60% YoY ग्रोथ), ₹65 करोड़ का घटा हुआ एडजस्टेड EBITDA लॉस।
- हाइपरप्योर (B2B) रेवेन्यू: ₹1,034 करोड़, ₹6 करोड़ एडजस्टेड EBITDA के साथ।
- क्लोजिंग कैश बैलेंस: ₹18,288 करोड़।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को क्विक कॉमर्स सेगमेंट में कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने की क्षमता, अपने बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर को मैनेज करने और जारी GST मुकदमेबाजी से निपटने की क्षमता पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए। इसके इन्वेंट्री-आधारित मॉडल की प्रभावशीलता और रेवेन्यू रिपोर्टिंग पर इसका असर भी देखने लायक होगा।
