Dixon Technologies ने Q2 FY27 में **₹21,806 करोड़** का शानदार रेवेन्यू दर्ज किया है। मोबाइल और IT हार्डवेयर सेगमेंट में मजबूती के बावजूद कंपनी मार्जिन के दबाव से जूझ रही है, जिसे दूर करने के लिए अब डीप-टेक और बैकवर्ड इंटीग्रेशन पर जोर दिया जा रहा है।
मुनाफे के मोर्चे पर चुनौती
कंपनी ने इस तिमाही में ₹609 करोड़ का EBITDA और ₹293 करोड़ का PAT दर्ज किया है। मोबाइल बिजनेस इसका मुख्य इंजन बना हुआ है, जिसने कुल ₹20,093 करोड़ का योगदान दिया, जबकि IT हार्डवेयर से ₹2,160 करोड़ और टेलीकॉम से ₹1,837 करोड़ का रेवेन्यू आया है।
भविष्य की रणनीति: असेंबली से आगे की तैयारी
Dixon अब केवल असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहती। मैनेजमेंट ने IT हार्डवेयर में ₹500 करोड़ के निवेश की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य अगले दो सालों में ₹15,000-20,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना है। कंपनी अब AI और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को पूरा करने के लिए सिलिकॉन फोटोनिक्स और ऑप्टिकल ट्रांसीवर्स जैसे हाई-एंड सेक्टर में उतर रही है।
बिजनेस अपडेट्स
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में कंपनी की रफ्तार स्थिर है और FY27 के लिए 33-34 मिलियन यूनिट्स का गाइडेंस दिया गया है। कंपनी Vivo के ऑपरेशंस को पूरी तरह इंटीग्रेट कर रही है, जिसकी प्रक्रिया Q4 तक पूरी हो जाएगी। डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल के लिए नए प्लांट पर काम जारी है, जिनसे भविष्य में ₹6,000-7,000 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू आने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks)
फिलहाल, मोबाइल PLI 1 स्कीम खत्म होने और ग्लोबल स्तर पर मेमोरी की बढ़ती कीमतों के कारण मार्जिन पर दबाव है। कंपोनेंट्स और लॉजिस्टिक्स की लागत में तेजी के चलते शॉर्ट-टर्म मार्जिन में उतार-चढ़ाव दिख सकता है। साथ ही, डीप-टेक जैसे जटिल क्षेत्रों में उतरने के अपने तकनीकी जोखिम भी हैं।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को मार्च तक वर्किंग कैपिटल में सुधार पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि तब तक सरकारी PLI रिसिप्ट्स मिलने की उम्मीद है। कंपनी का इस फाइनेंशियल ईयर में ₹1,200-1,300 करोड़ का कैपेक्स (Capex) उसकी विस्तार की आक्रामक योजना का संकेत देता है।
