Coforge ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने नतीजे पेश कर दिए हैं, और ये नतीजे निवेशकों को खुश करने वाले हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू **35.9%** बढ़कर **₹16,403 करोड़** हो गया, जबकि नेट प्रॉफिट (PAT) में **91.6%** की शानदार उछाल के साथ यह **₹1,556 करोड़** पर पहुंच गया।
दमदार नतीजों के पीछे की कहानी
Coforge ने इस फाइनेंशियल ईयर में कमाल का प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के ₹12,073 करोड़ से बढ़कर ₹16,403 करोड़ हो गया। वहीं, नेट प्रॉफिट (PAT) भी ₹812 करोड़ से सीधे ₹1,556 करोड़ पर पहुंच गया, जो 91.6% की जबरदस्त बढ़ोतरी है। कंपनी ने $2.3 बिलियन के बड़े डील भी जीते हैं और अगले 12 महीनों के लिए $1.75 बिलियन का ऑर्डर बुक भी तैयार है।
ग्रोथ का राज: AI और अधिग्रहण
इस शानदार ग्रोथ के पीछे Coforge की 'AI-First' स्ट्रेटेजी और ताबड़तोड़ अधिग्रहण की रणनीति काम कर रही है। कंपनी अब एफर्ट-आधारित (effort-based) मॉडल से हटकर आउटकम-आधारित (outcome-based) प्राइसिंग की ओर बढ़ रही है, जिससे मार्जिन में भी सुधार देखा गया है। EBITDA मार्जिन 14.3% से बढ़कर 18.6% हो गया है, जो कि 431 bps का इजाफा है। इस साल Cigniti Technologies का अधिग्रहण पूरा हुआ और Encora Group व Rythmos Inc. को भी खरीदने की तैयारी है। इन सबके चलते कंपनी की डिजिटल इंजीनियरिंग क्षमताएं और बढ़ी हैं।
आगे क्या? रिस्क फैक्टर?
कंपनी का मानना है कि 'AI-First' स्ट्रेटेजी भविष्य में ग्रोथ को और बढ़ाएगी। अधिग्रहण किए गए कंपनियों का सफल इंटीग्रेशन (integration) अहम होगा। हालांकि, मैनेजमेंट ने कुछ मैक्रो इकोनॉमिक रिस्क (macroeconomic risks) की ओर इशारा किया है, जैसे कि जियोपॉलिटिकल टेंशन, करेंसी में उतार-चढ़ाव और कंपनियों द्वारा खर्चों में सावधानी। ये चीजें डील कन्वर्जन (deal conversion) की रफ्तार को धीमा कर सकती हैं।
निवेशकों को क्या देखना है?
अब निवेशकों की निगाहें अधिग्रहणों के इंटीग्रेशन पर होंगी। साथ ही, कंपनी अपने बड़े ऑर्डर बुक को रेवेन्यू में बदलने में कितनी कामयाब होती है, यह देखना होगा। आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच मजबूत मार्जिन बनाए रखना भी कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
