Cerebra Integrated Technologies ने आखिरकार IBC की धारा 10 के तहत कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू करने का ऐलान कर दिया है। कंपनी पर भारी कर्ज और खराब प्रदर्शन का दबाव है।
भारी घाटे से जूझ रही कंपनी
वित्तीय वर्ष FY26 के लिए जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, Cerebra Integrated Technologies का नेट लॉस बढ़कर ₹71.65 करोड़ पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह ₹47.26 करोड़ था। कंपनी की ग्रॉस इनकम भी सिमटकर केवल ₹5.97 करोड़ रह गई है, जो पिछले साल ₹35.75 करोड़ थी।
ऑडिटर्स ने उठाए गंभीर सवाल
कंपनी के ऑडिटर्स, YCRJ & Associates ने 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' जारी किया है। इसका मतलब है कि ऑडिटर्स को कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ को लेकर पर्याप्त सबूत नहीं मिले। ऑडिटर्स ने कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' (कारोबार जारी रखने की क्षमता) पर ही बड़ा सवाल उठा दिया है।
खतरे के संकेत (Risks to watch)
- इन्वेंट्री का लोचा: बिना किसी ठोस डॉक्यूमेंटेशन के ₹9.76 करोड़ का इन्वेंट्री डीवैल्यूएशन किया गया है।
- फंसा हुआ पैसा: विभिन्न सब्सिडियरीज और विदेशी पार्टियों से ₹106.26 करोड़ की रिकवरी पर संदेह है।
- पेंडिंग पेमेंट: ट्रेड रिसीवेबल्स ₹143.07 करोड़ पर हैं, जिनमें से ज्यादातर एक साल से अधिक समय से पेंडिंग हैं।
अब आगे क्या?
कंपनी फिलहाल लेंडर्स के लिए NPA बन चुकी है। मैनेजमेंट अब किसी नए इन्वेस्टर की तलाश में है ताकि कैपिटल इन्फ्यूजन हो सके और मौजूदा एसेट्स को बेचकर कुछ रिकवरी की जा सके। निवेशकों को अब NCLT की कार्यवाही पर नजर बनाए रखनी होगी क्योंकि कंपनी का भविष्य अब पूरी तरह से कोर्ट की निगरानी में है।
