Computer Age Management Services (CAMS) ने भारत का पहला डिजिटल प्लेटफॉर्म 'ConsenPro Self-Serve' लॉन्च किया है। यह टूल कंपनियों को DPDP (Digital Personal Data Protection) नियमों का पालन करने में मदद करेगा। कंपनी ने WhiteOak Capital Management और Helios Mutual Fund के साथ भी साझेदारी की है, जो इस प्लेटफॉर्म की सफलता के लिए एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
डेटा प्राइवेसी के क्षेत्र में CAMS का विस्तार
Global Fintech Fest (GFF) 2026 में पेश किया गया 'ConsenPro Self-Serve' एक ऑटोमेटेड समाधान है। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनियों को मैन्युअल पॉलिसी बनाने की झंझट से मुक्ति दिलाना है। इस प्लेटफॉर्म में डेटा डिस्कवरी, कंसेंट नोटिस जनरेशन और API-आधारित इंटीग्रेशन जैसे एडवांस्ड फीचर्स दिए गए हैं।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
वित्तीय संस्थानों के लिए अब DPDP नियमों का पालन करना अनिवार्य हो गया है। CAMS इस नए टूल के जरिए अब खुद को सिर्फ एक म्यूचुअल फंड रजिस्ट्रार से आगे बढ़ाकर एक रेगुलेटरी-टेक (RegTech) कंपनी के रूप में स्थापित कर रही है। इससे कंपनी की आय के नए स्रोत खुलने की उम्मीद है।
नई पार्टनरशिप्स का क्या है महत्व?
कंपनी ने WhiteOak Capital Management और Helios Mutual Fund के साथ नए करार किए हैं। ये कंपनियां अब CAMS के प्राइवेसी गवर्नेंस फ्रेमवर्क का उपयोग करेंगी। यह न केवल कंपनी के राजस्व को बढ़ाने में मदद करेगा बल्कि अन्य संस्थानों के लिए एक 'प्रूफ-ऑफ-कांसेप्ट' का काम भी करेगा।
निवेशकों के लिए जोखिम और संभावनाएं
हालांकि, कंपनी के लिए असली चुनौती मार्केट अडॉप्शन की है। यदि बाजार में प्रतिस्पर्धी कंपनियां कम कीमत पर समान सेवाएं लेकर आती हैं, तो CAMS के मार्जिन पर दबाव बन सकता है। आने वाले समय में निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कितनी और कंपनियां इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाती हैं और यह कंपनी के कोर बिजनेस के मुकाबले कितना रेवेन्यू जेनरेट कर पाता है।
