Brightcom Group: मुनाफे में भारी उछाल के बावजूद कंपनी की मुश्किलें बरकरार

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AuthorNeha Patil|Published at:
Brightcom Group: मुनाफे में भारी उछाल के बावजूद कंपनी की मुश्किलें बरकरार

Brightcom Group ने FY 2025-26 के लिए **35.5%** की प्रॉफिट ग्रोथ दिखाई है, लेकिन कंपनी पर ऑडिटर्स ने गंभीर सवाल उठाए हैं। इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल की कमी और SEBI की कानूनी लड़ाई के कारण निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

आंकड़ों में दिखी चमक

कंपनी ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें रेवेन्यू 34.6% बढ़कर ₹6,928.06 करोड़ पहुंच गया है। वहीं, नेट प्रॉफिट में 35.5% की बढ़ोतरी दर्ज करते हुए यह ₹962.33 करोड़ हो गया है। हालांकि, इस चमक के पीछे एक 'क्वालीफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) का काला साया है। बोर्ड ने कैपिटल प्रिजर्वेशन का हवाला देते हुए इस साल कोई डिविडेंड (Dividend) न देने का फैसला लिया है।

क्यों चिंता में हैं निवेशक?

ऑडिटर्स ने साफ कहा है कि कंपनी के पास इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल्स पर्याप्त नहीं हैं। सबसे बड़ा रिस्क यह है कि विदेशी शाखाओं (Foreign Branches) के रेवेन्यू की कोई स्वतंत्र ऑडिट पुष्टि नहीं हो पाई है। इसके अलावा, SEBI की ओर से एसेट इम्पेयरमेंट और प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट को लेकर चल रही कानूनी जांच कंपनी की गवर्नेंस पर बड़े सवाल खड़े करती है।

नया दांव: Brightcom Defence

इन चुनौतियों के बीच कंपनी ने अपने बिजनेस को डाइवर्सिफाई करते हुए 'Brightcom Defence' नाम का एक नया डिवीजन लॉन्च किया है। यह डिवीजन AI-आधारित ऑटोनॉमस सिस्टम्स और 'MaestroOS' प्लेटफॉर्म पर फोकस करेगा। हालांकि, डिफेंस जैसे अत्यधिक रेगुलेटेड सेक्टर में कदम रखना एक बड़ा रिस्क है।

आगे क्या?

निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि कंपनी SEBI के कानूनी मामलों को कैसे सुलझाती है और अपने इंटरनल कंट्रोल सिस्टम को कितना मजबूत करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.