Veranda Learning Solutions ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में मुनाफे में शानदार वापसी की है। कंपनी ने पिछले साल के घाटे को पाटते हुए **₹128.86 करोड़** का कंसोलिडेटेड मुनाफा दर्ज किया है। साथ ही, कंपनी ने **₹357.42 करोड़** QIP के जरिए सफलतापूर्वक जुटाए हैं।
Veranda Learning की शानदार वापसी: FY26 में ₹128.86 करोड़ का मुनाफा
Veranda Learning Solutions ने वित्तीय वर्ष 2025-26 (31 मार्च 2026 को समाप्त) के लिए अपने नतीजों की घोषणा कर दी है। कंपनी ने इस अवधि में ₹128.86 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के ₹213.73 करोड़ के कंसोलिडेटेड घाटे से एक बड़ी वापसी है। कंपनी के ऑपरेशन्स से रेवेन्यू में भी 34.6% की जोरदार बढ़ोतरी देखी गई, जो पिछले साल के ₹357.73 करोड़ से बढ़कर ₹481.51 करोड़ हो गया है।
'Veranda 2.0' का कमाल और ₹357 करोड़ का फंड जुटाना
यह टर्नअराउंड (Turnaround) कंपनी की 'Veranda 2.0' नाम की स्ट्रेटेजिक रीस्ट्रक्चरिंग (Strategic Restructuring) योजना की सफलता को दर्शाता है। इस योजना के तहत, कंपनी ने अपने कॉमर्स वर्टिकल को J.K. Shah Commerce Education Ltd. में डीमर्ज (Demerge) किया और वोकेशनल सेगमेंट के लिए SNVA EduTech के साथ 50:50 की पार्टनरशिप की। इन बड़े कॉर्पोरेट कदमों के साथ ही, कंपनी ने ₹357.42 करोड़ का Qualified Institutional Placement (QIP) सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिससे कंपनी की कैपिटल (Capital) मजबूत हुई है और कर्ज को कम करने में मदद मिली है।
आगे क्या?
इस सफल रीस्ट्रक्चरिंग और फंड जुटाने के बाद, Veranda Learning अब अपना ध्यान भौगोलिक विस्तार (Geographic Expansion), पोर्टफोलियो विविधीकरण (Portfolio Diversification) और मौजूदा वर्टिकल्स को मजबूत करने पर केंद्रित करेगी। डीमर्जर से कॉमर्स बिजनेस को अलग से कैपिटल जुटाने में मदद मिलेगी, जबकि वोकेशनल पार्टनरशिप से इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशनल बेनिफिट्स (International Institutional Benefits) की उम्मीद है।
किन जोखिमों पर नजर?
हालांकि कंसोलिडेटेड स्तर पर कंपनी मुनाफे में आई है, लेकिन स्टैंडअलोन (Standalone) लेवल पर ₹0.93 करोड़ का घाटा चिंता का विषय है। यह दर्शाता है कि अभी भी व्यक्तिगत यूनिट्स के स्तर पर चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके अलावा, कंपनी सरकारी भर्ती परीक्षाओं पर निर्भर है और मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर्स (Macroeconomic Factors) जैसे महंगाई और आर्थिक मंदी का असर एजुकेशन खर्च पर पड़ सकता है।
