NIIT Ltd ने FY26 के लिए अपने नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी का मुनाफा 88% घटकर ₹5.9 करोड़ रह गया, हालांकि रेवेन्यू 9.1% बढ़कर ₹390.2 करोड़ हो गया।
NIIT Ltd FY26 नतीजे: AI में निवेश से प्रॉफिट पर असर, रेवेन्यू में ग्रोथ
कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 87.7% की बड़ी गिरावट के साथ ₹5.9 करोड़ (₹590 लाख) दर्ज किया गया है, जो पिछले साल ₹48.0 करोड़ था। वहीं, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 9.1% बढ़कर ₹390.2 करोड़ (₹39,020 लाख) हो गया है। स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹121.1 करोड़ रहा, जिसमें ₹10.5 करोड़ का लॉस दर्ज किया गया। कंपनी का ऑर्डर इनटेक ₹420.9 करोड़ रहा।
क्यों गिरी मुनाफा, क्यों बढ़ी कमाई?
कंपनी एक बड़े स्ट्रेटेजिक बदलाव से गुजर रही है, जिसका लक्ष्य 'AI-फर्स्ट' एंटरप्राइज बनना है। इस वजह से कंपनी सेल्स, मार्केटिंग और नई AI क्षमताओं पर भारी निवेश कर रही है। इसी वजह से मुनाफा कम हुआ है, लेकिन रेवेन्यू में बढ़ोतरी देखी गई है। यह दिखाता है कि कंपनी फिलहाल शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट के बजाय लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
कंपनी का बैकग्राउंड और आगे की रणनीति
NIIT ने AI-रिलेटेड प्रोग्राम्स पर फोकस बढ़ाया है, जो Q4 FY26 में कंपनी के रेवेन्यू का 8% रहे। कंपनी ने ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करने के लिए RPS Consulting और IFBI के मर्जर को मंजूरी दी है। साथ ही, यूनिवर्सिटी और अर्ली-करियर सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए iamneo Edutech Private Limited में 70% हिस्सेदारी का अधिग्रहण भी किया है।
कंपनी iamneo को इंटीग्रेट कर रही है और उम्मीद है कि AI-लेड ट्रेनिंग रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा बनेगी। मैनेजमेंट का मानना है कि BFSI हायरिंग का माहौल सामान्य होने और AI ट्रेनिंग पोर्टफोलियो के बढ़ने पर कमाई में सुधार होगा।
जोखिम जिन पर नज़र रखनी चाहिए
NIIT को मैक्रोइकॉनॉमिक और इंडस्ट्री-स्पेसिफिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। BFSI सेक्टर में उतार-चढ़ाव, जहाँ कुछ बड़े बैंक फ्रेश हायरिंग ट्रेनिंग कम कर रहे हैं, ने वॉल्यूम को प्रभावित किया है। इसके अलावा, बड़ी टेक कंपनियों द्वारा कैपिटल एक्सपेंडिचर में सावधानी बरतने से नियर-टर्म चुनौतियां बनी हुई हैं।
आगे क्या देखना महत्वपूर्ण होगा?
निवेशक ₹420.9 करोड़ के ऑर्डर इनटेक को प्रॉफिटेबल रेवेन्यू में बदलने की प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रखेंगे। RPS Consulting और IFBI के मर्जर की प्रगति, AI-लेड पेशकशों का विस्तार और BFSI हायरिंग में रिकवरी महत्वपूर्ण इंडिकेटर्स होंगे।
