इलेक्ट्रिक स्कूटर्स के इम्पोर्ट को लेकर Zelio E-Mobility को कस्टम विभाग से एक बड़ा नोटिस मिला है। कंपनी पर गलत क्लासिफिकेशन और गलत ड्यूटी बेनिफिट लेने का आरोप है।
Zelio E-Mobility को कस्टम विभाग से क्यों मिला नोटिस?
Zelio E-Mobility Ltd को कस्टम विभाग के प्रिंसिपल कमिश्नर, ICD PPG & Other ICDs, दिल्ली से 29 जुलाई, 2026 को एक 'डिमांड कम शो कॉज नोटिस' मिला है। यह नोटिस E-Scooter के इम्पोर्ट से जुड़ा है, जिन्हें 'नॉक डाउन (CKD)' कंडीशन में मंगाया गया था।
क्या हैं आरोप?
आरोपों के मुताबिक, कंपनी ने इम्पोर्ट किए गए सामान का गलत क्लासिफिकेशन किया और 'IGST' (Integrated Goods and Services Tax) के तहत गलत रियायतों का फायदा उठाया। यह नोटिस कंपनी को 30 जुलाई, 2026 को मिला, लेकिन स्पैम फोल्डर में होने की वजह से कंपनी की इंटरनल जांच 03 अगस्त, 2026 को ही शुरू हो पाई।
क्यों है यह अहम?
इस नोटिस के कारण कस्टम एक्ट, 1962 के तहत कंपनी को कस्टम ड्यूटी की बकाया राशि, उस पर लगने वाला ब्याज और जुर्माना भरना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, इम्पोर्ट किए गए सामान को जब्त भी किया जा सकता है। इसका सीधा असर Zelio के इम्पोर्ट की लागत और वित्तीय देनदारियों पर पड़ेगा।
क्या होगा आगे?
Zelio E-Mobility फिलहाल इस नोटिस की जांच कर रही है और कानूनी सलाह ले रही है। कंपनी को जवाब देने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। Zelio अपने हितों की रक्षा के लिए कदम उठा रही है, हालांकि इसका वित्तीय प्रभाव अभी तय नहीं हुआ है।
मुख्य जोखिम
इस मामले में सबसे बड़ा जोखिम भारी जुर्माना, बकाया ड्यूटी और ब्याज की वसूली हो सकता है। सामान जब्त होने की संभावना भी बनी हुई है।
