Virtual Global Education ने ऑडिट समायोजन के बाद ₹0.80 करोड़ का शुद्ध नुकसान दर्ज किया है, जो पहले बताई गई ₹0.07 करोड़ की मुनाफे की तुलना में एक बड़ा बदलाव है। कंपनी के ऑडिटर्स ने आंतरिक नियंत्रण में गंभीर खामियों और पूर्व CFO से जुड़े धोखाधड़ी के आरोपों की ओर इशारा किया है।
ऑडिट के बाद मुनाफे में भारी गिरावट
Virtual Global Education के लिए जून 2026 को समाप्त तिमाही के नतीजे चौंकाने वाले रहे। कंपनी ने पहले ₹0.07 करोड़ (₹7.01 लाख) का मुनाफा दिखाया था, लेकिन ऑडिट समायोजन के बाद यह आंकड़ा ₹0.80 करोड़ (₹79.73 लाख) के शुद्ध नुकसान में बदल गया। कंपनी की कुल संपत्ति ₹83.21 करोड़ (₹8320.86 लाख) से घटकर ₹82.34 करोड़ (₹8234.13 लाख) रह गई, और शुद्ध संपत्ति ₹75.14 करोड़ (₹7514.06 लाख) से कम होकर ₹74.27 करोड़ (₹7427.33 लाख) हो गई।
क्या हुआ और क्यों यह मायने रखता है?
ऑडिटर्स ने कंपनी के वित्तीय बयानों को 'क्वालिफाई' (qualify) किया है, जिसका मतलब है कि उन्हें वित्तीय नियंत्रण में गंभीर कमजोरियां और अविश्वसनीय व्यय मिले हैं। इस समायोजन के बाद, जहां पहले मुनाफा दिख रहा था, वहीं अब शुद्ध नुकसान सामने आया है। यह निवेशकों के विश्वास को गहरा झटका देता है, क्योंकि कंपनी की असली वित्तीय स्थिति और संपत्ति के मूल्यांकन पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
धोखाधड़ी का एंगल और अनवेरिफाइड खर्चे
ऑडिटर्स को पूर्व CFO और डायरेक्टर, श्री अंकित शर्मा पर वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग ₹0.88 करोड़ (₹88.18 लाख) की हेराफेरी का संदेह है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी भुगतान और अनधिकृत हस्तांतरण के जरिए पैसे का गबन किया। कंपनी ने उनके खिलाफ पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई है।
इसके अलावा, कंपनी के पास ₹33 करोड़ से अधिक के महत्वपूर्ण खर्च और संपत्ति के ऐसे दावे हैं जिनके लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं। इनमें जमीन की खरीद के लिए ₹5.32 करोड़ का एडवांस, ₹21.44 करोड़ के लोन और एडवांसेज, और ₹6.37 करोड़ का ट्रेनिंग एक्सपेंस शामिल हैं।
आगे क्या?
कंपनी का प्रबंधन इन अविश्वसनीय खर्चों के लिए दस्तावेज़ इकट्ठा करने और धोखाधड़ी से वसूली के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू करने में लगा है। हालांकि, ऑडिटर्स अभी तक इन लेन-देन की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर पाए हैं।
मुख्य जोखिम
निवेशकों को मुख्य रूप से धोखाधड़ी से संबंधित धन की वसूली न हो पाने, अविश्वसनीय संपत्ति और व्यय का सत्यापन न हो पाने, और आंतरिक नियंत्रणों की कमजोरी के कारण भविष्य की वित्तीय रिपोर्टिंग में निरंतर समस्याओं का सामना करने का जोखिम है।
