UP Hotels ने वॉलंटरी डेलिस्टिंग (Delisting) पूरा करने के लिए SEBI से समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। इसके लिए कंपनी ने पोस्टल बैलट के जरिए शेयरहोल्डर्स से मंजूरी मांगी है, ताकि 2001 से चले आ रहे शेयरहोल्डिंग नियमों के उल्लंघन के मुद्दे को सुलझाया जा सके।
डेलिस्टिंग का पेच और SEBI का रुख
फिलहाल कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 88.39% है, जबकि पब्लिक फ्लोट केवल 11.61% बचा है। कंपनी 2001 से ही 'मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग' (MPS) के नियमों का पालन नहीं कर पा रही है। SEBI ने इससे पहले कंपनी के तीन एक्सटेंशन अनुरोधों को इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि प्रमोटर्स की डेलिस्टिंग को लेकर गंभीरता संदिग्ध थी। रेगुलेटर का कहना था कि प्रमोटर्स या तो वोटिंग से दूर रहे या उन्होंने इसके खिलाफ वोट किया।
वोटिंग का पूरा गणित
कंपनी ने अब एक बार फिर कोशिश की है। इसके लिए वोटिंग का शेड्यूल इस प्रकार है:
- कट-ऑफ डेट: 11 सितंबर 2026
- ई-वोटिंग की शुरुआत: 15 सितंबर 2026 (सुबह 9:30 बजे)
- ई-वोटिंग की समाप्ति: 14 अक्टूबर 2026 (शाम 5:00 बजे)
- स्क्रूटिनाइजर: दीपक बंसल (दीपक बंसल एंड एसोसिएट्स)
आगे की राह और जोखिम
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क SEBI द्वारा चौथी बार रिजेक्शन का है। यदि इस बार भी प्रमोटर्स और शेयरहोल्डर्स के बीच तालमेल नहीं दिखा, तो कंपनी पर रेगुलेटरी पेनाल्टी का खतरा बढ़ सकता है। यह वोटिंग कंपनी की साख और भविष्य की डेलिस्टिंग के लिए 'डू ऑर डाई' जैसा मौका है। बाजार की नजर 14 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि क्या कंपनी को रेगुलेटर से राहत मिलेगी या नहीं।
