TAKE Solutions ने BSE और NSE को ₹10.62 लाख का रेगुलेटरी जुर्माना भरा है। कंपनी ने प्रमुख पदों जैसे MD, CFO और कंपनी सेक्रेटरी की नियुक्तियों को भी पूरा कर लिया है, जो मई 2026 तक प्रभावी होंगी।
कंपनी ने सुधारी गवर्नेंस, भरा ₹10.62 लाख का जुर्माना
TAKE Solutions ने बोर्ड कंपोजिशन और प्रमुख पदों पर नियुक्तियों में देरी के कारण BSE और NSE को कुल ₹10.62 लाख का जुर्माना चुकाया है। यह खुलासा कंपनी की फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए सीक्रेट्रियल कंप्लायंस रिपोर्ट में हुआ है।
क्या हुआ और क्यों?
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी बोर्ड में जरूरी बदलावों का पालन नहीं कर सकी और कंपनी सेक्रेटरी (CS) व कंप्लायंस ऑफिसर की नियुक्ति में देरी की। इसके चलते BSE ने ₹2.60 लाख और NSE ने ₹8.02 लाख का जुर्माना लगाया।
इससे भी बड़ी बात यह है कि कंपनी के ऑडिटर, M/s. Venkat and Rangaa LLP, ने भी 25 मार्च 2026 को फीस के मसले पर इस्तीफा दे दिया। अब FY26 के ऑडिट के लिए A. Raghavendra Rao & Associates को नियुक्त किया गया है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
ये मुद्दे TAKE Solutions के लिए पिछले गवर्नेंस तनाव और ऑपरेशनल दिक्कतों का संकेत देते हैं। हालांकि, कंपनी ने अब मिस्टर सुनील पात्रा को 19 मई 2026 से MD और CFO के तौर पर नियुक्त कर दिया है। वहीं, 27 मई 2025 से मिस सोनिया भीमराजका कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर होंगी।
लेकिन साल के अंत में ऑडिटर का इस्तीफा पारदर्शिता और ऑडिट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। पहले 'Z' कैटेगरी में कंपनी के ट्रांसफर का इतिहास यह भी बताता है कि अभी भी लिक्विडिटी और स्टेबिलिटी को लेकर बड़े जोखिम बने हुए हैं।
आगे क्या?
अब महत्वपूर्ण लीडरशिप पोजिशन भर दी गई हैं और जुर्माना भी भर दिया गया है, तो कंपनी गवर्नेंस को स्थिर करने की कोशिश कर रही है। नए ऑडिटर की नियुक्ति एक कदम है, लेकिन ऑडिट की निरंतरता और गुणवत्ता आगे चलकर महत्वपूर्ण होगी। निवेशकों को SEBI के नियमों का पालन, समय पर फाइनेंशियल डिस्क्लोजर और स्थिर लीडरशिप पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
