TAI Industries ने अपनी FY 2025-26 की एनुअल रिपोर्ट के लिए एक सुधार (corrigendum) जारी किया है। इसमें छूटी हुई 'सीक्रेटेरियल ऑडिट रिपोर्ट' को जोड़ा गया है, जिसने कंपनी के गवर्नेंस और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
TAI Industries ने 27 अगस्त 2026 को जारी अपनी एनुअल रिपोर्ट में सुधार करते हुए अब 'सीक्रेटेरियल ऑडिट रिपोर्ट' (Form MR-3) को शामिल किया है, जो पहले डॉक्यूमेंट्स में छूट गई थी। T. Chatterjee & Associates द्वारा तैयार की गई यह ऑडिट रिपोर्ट कंपनी के इंटरनल कंट्रोल सिस्टम में बड़ी खामियों की ओर इशारा करती है।
क्यों चिंता का विषय है?
ऑडिट में साफ तौर पर कहा गया है कि कंपनी के पास अपनी साइज के हिसाब से कानूनी और रेगुलेटरी कंप्लायंस को मॉनिटर करने के लिए पर्याप्त सिस्टम नहीं हैं। सबसे अहम बात यह है कि कंपनी SEBI के 'Prohibition of Insider Trading' नियमों के तहत SDD (Structured Digital Database) का पालन करने में विफल रही है।
ऑडिट रिपोर्ट की मुख्य बातें:
- SDD नॉन-कंप्लायंस: कंपनी SEBI के रेगुलेशन 3(5) और 3(6) का पालन करने में नाकाम रही है।
- ROC फाइलिंग: कंपनी के होल-टाइम डायरेक्टर, मिस्टर Dasho Wangchuk Dorji की नियुक्ति को लेकर Registrar of Companies (West Bengal) में एडजुडिकेशन (adjudication) की प्रक्रिया अभी लंबित है।
- डॉक्यूमेंटेशन में कमी: बोर्ड मीटिंग्स के मिनट्स में 'लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट' को बोर्ड द्वारा अप्रूव किए जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
- प्रमोटर शेयर: कंपनी के 12,16,000 प्रमोटर शेयर अभी भी फिजिकल फॉर्म में हैं, हालांकि इन्हें 2012 के SEBI सर्कुलर के तहत छूट प्राप्त है।
आगे क्या रखें ध्यान?
निवेशकों को अब कंपनी के मैनेजमेंट पर नजर रखनी चाहिए कि वे अपने इंटरनल सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। ROC के साथ चल रही कानूनी प्रक्रिया और कंप्लायंस में सुधार की गति ही कंपनी के गवर्नेंस का असली सर्टिफिकेट होगी।
