पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के लिए राइट्स इश्यू
Steelco Gujarat 13,30,060 इक्विटी शेयर राइट्स इश्यू के ज़रिये ₹112 प्रति शेयर के भाव पर पेश करेगी। कंपनी का लक्ष्य SEBI के 25% मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) के नॉर्म्स को पूरा करना है।
प्रमोटर्स का बड़ा कदम
कंपनी में पब्लिक शेयरहोल्डिंग अभी सिर्फ 5.36% है, जो कि कुल 2,66,012 शेयर्स के बराबर है। वहीं, रीस्ट्रक्चरिंग के बाद कुल इक्विटी कैपिटल 49,66,012 शेयर्स का है। खास बात यह है कि कंपनी के प्रमोटर्स इस इश्यू में अपने राइट्स (अधिकार) छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं। इससे उनकी हिस्सेदारी कम होगी और MPS की ज़रूरतें पूरी हो सकेंगी। हर शेयर का फेस वैल्यू ₹10 है, जिस पर ₹102 का प्रीमियम जोड़ा गया है।
क्यों ज़रूरी है यह कदम?
SEBI के 25% MPS नॉर्म्स को पूरा करना Steelco Gujarat के लिए लिस्टिंग स्टेटस बनाए रखने और रेगुलेटरी कंप्लायंस के लिए बेहद अहम है। ऐसा न करने पर कंपनी पर पेनाल्टी लग सकती है या डीलिस्टिंग का खतरा भी हो सकता है। प्रमोटर्स द्वारा अपने अधिकार छोड़ने का फैसला इस रेगुलेटरी अड़चन को दूर करने में सीधे तौर पर मदद करेगा। कंपनी के प्रोडक्शन फिर से शुरू होने और ट्रेडिंग लिक्विडिटी बहाल होने से कंपनी के टर्नअराउंड के संकेत मिल रहे हैं।
कंपनी की पिछली कहानी
Steelco Gujarat एक कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुज़री है। नवंबर 2019 से बंद प्रोडक्शन 14 जुलाई, 2025 को फिर से शुरू हुआ। BSE ने 9 अक्टूबर, 2025 को कंपनी के रीस्ट्रक्चर्ड इक्विटी शेयर्स पर ट्रेडिंग सस्पेंशन भी हटा लिया था। कंपनी के सेक्रेटेरियल ऑडिटर ने पहले भी देरी से फाइनेंशियल रिपोर्टिंग और फाइलिंग जैसे कंप्लायंस इश्यूज की ओर इशारा किया था, जिसका कारण इन्सॉल्वेंसी पीरियड का दबाव बताया गया था।
आगे क्या?
यह राइट्स इश्यू कंपनी को रेगुलेटरी तौर पर पटरी पर लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। प्रमोटर्स की तरफ से हटने की पेशकश इस लक्ष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दर्शाती है। कंपनी ने एक कंप्लायंस ऑफिसर भी नियुक्त किया है और अपनी रिपोर्टिंग मैकेनिज्म को बेहतर बनाया है।
जोखिम (Risks)
हालांकि कंपनी ने ऑपरेशंस फिर से शुरू कर दिए हैं और MPS कंप्लायंस पर काम कर रही है, लेकिन अतीत के नॉन-कंप्लायंस इश्यूज, भले ही वे इन्सॉल्वेंसी से जुड़े हों, गवर्नेंस की चुनौतियों को दर्शाते हैं। निवेशकों को राइट्स इश्यू के सफल कंप्लीशन और कंपनी के लगातार कंप्लायंस प्रयासों पर नज़र रखनी चाहिए।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को राइट्स इश्यू के सब्सक्रिप्शन लेवल्स और इश्यू के बाद फाइनल शेयरहोल्डिंग पैटर्न पर नज़र रखनी चाहिए, ताकि MPS कंप्लायंस की पुष्टि हो सके। साथ ही, कंपनी के लगातार ऑपरेशन्स और रेगुलेटरी फाइलिंग्स का पालन भी अहम होगा।
